• संख्या बढ़ाने के लिए इंदौर से लाई जाएगी नई शेरनी।

संवाददाता
कानपुर। कभी शेरों की दहाड़ से गूंजने वाला कानपुर का प्राणी उद्यान आज वीरान सा लगता है। 1998 से 2016 के बीच यहां 11 शेर-शेरनी लाए गए थे, लेकिन बीमारी और वृद्धावस्था के चलते अब सिर्फ 3 ही बचे हैं। पिछले 9 सालों से न कोई नया शेर आया है और न कोई शावक पैदा हुआ है।
नवंबर 1998 में जंगल से पकड़कर ‘पाउल’ नाम के शेर को जूनागढ़ से लाया गया था। साथ में शेरनियां राजवंती और नंदा भी आई थीं। पाउल की 2003 में, राजवंती की 1999 में और नंदा की 2001 में मौत हो गई।
अक्टूबर 2001 में हैदराबाद से शेरनी नंदिनी लाई गई जिसकी 2024 में आंतों की बीमारी से मौत हुई। फरवरी 2003 में हैदराबाद से ही चित्रा, गौरी और नागेश आए। चित्रा 2009 में हार्ट अटैक से, नागेश 2010 में किडनी फेल और गौरी 2010 में आंतों की बीमारी से मरीं।
अप्रैल 2013 में हैदराबाद से विष्णु और लक्ष्मी आए जिन्हें बाद में लायन सफारी भेज दिया गया। 2016 में रायपुर से अजय और नंदिनी को लाया गया। अजय की मौत इस साल जून में हो गई।
2017 में नंदिनी ने 6 शावकों को जन्म दिया। इनमें सुंदरी भी थी जिसे जन्म के बाद मां ने नहीं अपनाया। डॉक्टरों ने अमेरिका से ‘किटन मिल्क’ मंगवाकर 9 महीने तक उसे पाला। बड़ी होने पर सुंदरी को तिरुपति भेज दिया गया जहां उसने शावकों को जन्म दिया।
फिलहाल उद्यान में सिर्फ शेरनी नंदिनी और उसके दो बच्चे शंकर व उमा ही हैं। 2016 के बाद प्रजनन पूरी तरह रुक गया है। इसके उलट बाघों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
शेरों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रशासन अब सक्रिय हुआ है। निदेशक डॉ. कन्हैया पटेल ने बताया कि इंदौर चिड़ियाघर से एक शेरनी लाने की कवायद चल रही है। इसके बदले यहां से दरियाई घोड़ा इंदौर भेजा जाएगा। नई शेरनी का जोड़ा शेर शंकर के साथ बनाया जाएगा ताकि वंश वृद्धि हो सके।






