• पूरे प्रदेश के लिए तैयार करके भेजे जाएंगे टेक्नीशियन और पैरामेडिकल।

संवाददाता
कानपुर। प्रदेश के चिकित्सा ढांचे को और मजबूत करने के लिए कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज को एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों के लिए ‘हब’ (मुख्य केंद्र) के रूप में काम करेगा, जबकि बाकी सभी मेडिकल कॉलेज इससे ‘स्पोक’ (शाखाओं) की तरह जुड़ेंगे।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि इस नए ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ को धरातल पर उतारने और इसे जल्द सुचारू करने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार शुरू कर दिया गया है। अगले सत्र से लागू होने वाले इस मॉडल के तहत जीएसवीएम में तैयार होने वाली पैरामेडिकल और तकनीशियनों की टीम पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती देगी।
हाल ही में लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय की टीम ने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था। यहाँ की बेहतरीन सुविधाओं, आधुनिक लैब और उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यशैली को देखते हुए कॉलेज को इस बड़े मॉडल के नोडल सेंटर के रूप में संचालित करने का फैसला लिया गया।
जीएसवीएम पहले से ही हेपेटाइटिस रोग नियंत्रण समेत कई बड़े सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में नोडल की तरह अपनी जिम्मेदारी संभाल रहा है। अब इस नई जिम्मेदारी के मिलने से संस्थान का कद प्रदेश भर में और बढ़ गया है।
इस नए मॉडल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कानपुर का जीएसवीएम अब मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा। यहाँ नए सत्र से ओटी टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ को एडवांस और आधुनिक तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन टेक्नीशियनों और पैरामेडिकल टीमों को जरूरत के आधार पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में तैनात किया जाएगा। इससे राज्य भर के अस्पतालों में कुशल स्टाफ की कमी दूर होगी और आम मरीजों को उनके ही जिले में बेहतर इलाज मिल सकेगा।
नए कोर्स, पीएचडी और फेलोशिप को भी मिलेगा बढ़ावा
प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बुधवार 10 बजे बताया कि, इस मॉडल को सुचारू करने के लिए कॉलेज के सभी विभागों और वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हब एंड स्पोक मॉडल के तहत मेडिकल कॉलेज में न सिर्फ बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
हालांकि, उच्च स्तरीय शोध, पीएचडी, फेलोशिप प्रोग्राम, नए स्किल कोर्सेज और एडवांस ट्रेनिंग प्रोग्राम को भी तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा। अगले सत्र से यहाँ से निकलने वाला स्टाफ यूपी की चिकित्सा व्यवस्था को हाईटेक और पहले से कहीं ज्यादा बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।






