May 2, 2026

• डॉक्टरों ने दी चेतावनी- जानलेवा हो सकती है गर्मी।

कानपुर। भीषण गर्मी में तेज धूप और उमस ने हालात बिगाड़ दिए हैं। गर्मी का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिखने लगा है।अस्पतालो के इमरजेंसी विभाग गर्मी से बेहाल मरीजों से भरने लगे हैं।  एलएलआर अस्पताल हैलट में 35 और उर्सला अस्पताल में 17 मरीज तेज गर्मी के कारण सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय ‘हीट हेडेक’ यानी गर्मी से होने वाला सिरदर्द तेजी से बढ़ रहा है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी के कारण होने वाले सिरदर्द को ‘हीट हेडेक’ कहा जाता है। जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को सामान्य से ज्यादा तेजी से खून पंप करना पड़ता है। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही स्थिति अचानक दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकती है, खासकर उन लोगों में जो पहले से दिल या बीपी की बीमारी से जूझ रहे हैं।
गर्मी का असर सिर्फ सिरदर्द तक सीमित नहीं है। शरीर के अंदरूनी अंग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर का तापमान बढ़ने से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। वहीं गर्म और सूखी हवा अस्थमा मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा रही है। सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और थकान के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन भी हीट एग्जर्शन के संकेत हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलना सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। इस दौरान लू और गर्म हवाएं शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर और शरीर को ढककर निकलें और तेज धूप से बचाव करें। साथ ही इस समय भारी काम या ज्यादा एक्सरसाइज करने से बचने की सलाह दी गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेटेड रखना। दही, सत्तू, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन फायदेमंद है। वहीं तला-भुना खाना, चाय-कॉफी और नशे से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ाते हैं। इस समय बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और शुगर-बीपी के मरीजों को खास सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस उमस भरी गर्मी में उनके लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। कानपुर। भीषण गर्मी में तेज धूप और उमस ने हालात बिगाड़ दिए हैं। गर्मी का असर अब सीधे लोगों की सेहत पर दिखने लगा है।अस्पतालो के इमरजेंसी विभाग गर्मी से बेहाल मरीजों से भरने लगे हैं।  एलएलआर अस्पताल हैलट में 35 और उर्सला अस्पताल में 17 मरीज तेज गर्मी के कारण सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचे। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय ‘हीट हेडेक’ यानी गर्मी से होने वाला सिरदर्द तेजी से बढ़ रहा है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक और ऑर्गन फेलियर जैसी गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, तेज धूप और शरीर में पानी की कमी के कारण होने वाले सिरदर्द को ‘हीट हेडेक’ कहा जाता है। जब तापमान बढ़ता है, तो शरीर को ठंडा रखने के लिए दिल को सामान्य से ज्यादा तेजी से खून पंप करना पड़ता है। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही स्थिति अचानक दिल का दौरा पड़ने का कारण बन सकती है, खासकर उन लोगों में जो पहले से दिल या बीपी की बीमारी से जूझ रहे हैं।
गर्मी का असर सिर्फ सिरदर्द तक सीमित नहीं है। शरीर के अंदरूनी अंग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर का तापमान बढ़ने से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। वहीं गर्म और सूखी हवा अस्थमा मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा रही है। सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न और थकान के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन भी हीट एग्जर्शन के संकेत हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलना सबसे खतरनाक साबित हो सकता है। इस दौरान लू और गर्म हवाएं शरीर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर और शरीर को ढककर निकलें और तेज धूप से बचाव करें। साथ ही इस समय भारी काम या ज्यादा एक्सरसाइज करने से बचने की सलाह दी गई है।
डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सबसे जरूरी है शरीर को हाइड्रेटेड रखना। दही, सत्तू, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन फायदेमंद है। वहीं तला-भुना खाना, चाय-कॉफी और नशे से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ाते हैं। इस समय बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और शुगर-बीपी के मरीजों को खास सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इस उमस भरी गर्मी में उनके लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

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