February 25, 2026

संवाददाता 

कानपुर। विकास की गाड़ी रफ्तार जब फाइलों में अटकती है, तो सड़कों पर धूल और पत्थर उड़ने लगते हैं। वार्ड 41 के अंबेडकर चौराहे से जागृति हॉस्पिटल तक की यह सड़क आज विकास का नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का उदाहरण बन चुकी है।
10 सितंबर 2025 को बड़े तामझाम के साथ जिसका शिलान्यास हुआ, उस सड़क का निर्माण 5 महीने बाद भी पूरा नहीं हुआ। आलम यह है कि 500 मीटर के इस दायरे में रहने वाले 100 परिवारों का जीना मुहाल हो गया है।
पिछले 7-8 सालों से यहां रह रहे सत्यप्रकाश की व्यथा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वे बताते हैं, जब वाहन निकलते हैं तो गिट्टियां गोलियों की तरह उड़ती हैं। गाड़ियों के शीशे टूट रहे हैं और घरों के दरवाजों से पत्थर टकराते हैं। डर लगता है कि कहीं किसी इंसान को गंभीर चोट न लग जाए।

सत्यप्रकाश आगे बताते हैं कि हाल ही में गिट्टियों पर फिसलकर लोग घायल हुए और एक चार पहिया गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्षद ने सड़क बनने का आश्वासन दिया था, लेकिन फिलहाल सिर्फ गिट्टियां डालकर काम छोड़ दिया गया है।
क्षेत्रीय निवासी शिव प्रताप सिंह बताते हैं, कि यह सड़क भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। वे कहते हैं, 15 वें आयोग से इसका पैसा पास हुआ था, लेकिन 5 महीने से काम लटका है। स्पीड में गाड़ी निकलने पर इतनी धूल उड़ती है कि लोगों को दमा और सांस की बीमारी होने का खतरा पैदा हो गया है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं। शिव प्रताप के अनुसार, “ठेकेदार मिट्टी के ऊपर ही डामर का लेप लगाना चाहता था। हमने विरोध किया और डामर के ट्रक वापस करवा दिए। जेई और पार्षद आए, लेकिन समाधान होने के बजाय काम रुक गया। अब दोबारा गिट्टियां तो डाली गई हैं, पर सड़क वैसी की वैसी ही पड़ी है