February 26, 2026

•डीएल, राशनकार्ड, राशनकार्ड हुए निरस्त।

संवाददाता 
कानपुर।
एक जिंदा युवक को मुर्दा घोषित करने  का मामला सामने आया है। लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कराने वाले गौरव शाहू का जिंदा रहते हुए ही स्वास्थ्य विभाग ने 12 सितंबर 2025 को डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इस बात की जानकारी गौरव को तब हुई, जब उसका नाम राशन कार्ड से कट गया।

पीड़ित गौरव ने बताया कि  मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में लापरवाही से मुझे कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। जब मैं सुधार कराने गया तो अस्पताल प्रशासन ने कह दिया कि “ये हमारे बस में नहीं है।” अब अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हूं।
गौरव साहू गोविंद नगर क्षेत्र के निराला नगर के रहने वाले हैं। ये लावारिस लोगों को अस्पतालों में एडमिट कराते है और लावारीसों का अंतिम संस्कार करते हैं। गौरव साहू ने बताया कि मैंने 7 सितंबर को एक लावारिस मरीज को मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके बाद मरीज की 12 सितंबर 2025 को मौत हो गई।
डॉक्टरों की लापरवाही से मेरा आधार कार्ड जो पैरोकारी में लगा था, उसे लगाकर मुझे डिसीज (मृत्यु) घोषित कर दिया है। फिर मैंने उस लावारिस लाश का अंतिम संस्कार किया था। जिसके बाद मेरा आधार कार्ड इन वैलिड हो गया।
गौरव बताते हैं, जब हम जनवरी 2026 में सरकारी राशन की दुकान से राशन लेने पहुंचे तो मेरा नाम कटा हुआ था। मुझे लगा कि कोई गलती हुई होगी। 

जब मैंने बैंक अकाउंट से पैसे निकालने की कोशिश की तो वो भी ब्लॉक कर दिया गया था। मैंने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है। जब मैंने आधार कार्ड के बारे में जानकारी की तो वो इनवैलिड था। मेरा ड्राइविंग लाइसेंस, पैनकार्ड सब रिजेक्ट हो गए थे। मुझे कुछ समझ में नहीं आया। फिर मैंने पता किया तो जानकारी हुई मैं तो मर चुका हूं।

सभी कागजों के कैंसिल होने के बाद मुझे विभागों के चक्कर लगाते हुए करीब 1 महीने हो गए। मैने सीएमओ  ऑफिस में शिकायती पत्र दिया था। जिसके बाद मुझे सीएमओ साहब ने 23 फरवरी को एक कैन्सेलशन का फार्म दिया है। अब कैन्सेलशन फॉर्म सभी ऑफिस में सबमिट करना पड़ेगा। तब मेरे सभी कागज सही हो पाएंगे। जिसके बाद मुझे किसी भी योजना का लाभ मिल पाएगा।

गौरव शाहू ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कानपुर नगर को एक शिकायती पत्र देते हुए लिखा है कि  “मैं गौरव साहू, पिता अमीर चंद्र साहू, निवासी अंबेडकर नगर, कच्ची बस्ती, जूही कानपुर नगर का निवासी हूं। यह बताना चाहता हूं कि मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल में लापरवाही से मुझे कागजों में मृत घोषित कर दिया गया। जब मैं सुधार कराने गया तो अस्पताल प्रशासन ने कह दिया कि “ये हमारे बस में नहीं है।” इस गलती से से मेरा आधार यूआईडी  इनवैलिड हो गया है और मैं सभी सरकारी सेवाओं से वंचित हो गया हूं। अतः आपसे निवेदन है कि मामले की जांच कर अस्पताल को तत्काल रिकार्ड सुधारने व लिखित सुधार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दें।”
कानपुर का हैलट अस्पताल अक्सर ऐसे करनामों के लिए चर्चा में बना रहता है। करीब दो महीने पहले हैलट अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में युवक की मौत की सूचना पर पुलिस टीम हैलट पहुंची थी। पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की कागजी प्रक्रिया शुरू की। बेड के पास गए तो पता चला कि युवक जिंदा है।
इसके बाद डॉक्टरों और पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि वार्ड नंबर- 12 में दो मरीज भर्ती थे। बेड नंबर- 42 पर विनोद और बेड नंबर- 43 पर 60 साल का लावारिस बुजुर्ग भर्ती था। असल में मौत लावारिस बुजुर्ग की हुई थी। लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने बेड नंबर- 42 पर भर्ती दूसरे मरीज विनोद को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने विनोद की फाइल पर लिखे नंबर पर फोन किया। फिर उसके साथी और घरवाले आए थे। इस मामले में यूपी के डिप्टी सीएम के निर्देश के बाद तीन कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया था।
गौरव के मामले में मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि  हो सकता है युवक ने अपने आधारकर्ड में खुद कुछ किया हो। हालांकि उसके कागज सही करवा दिए गए हैं।