
संवाददाता
कानपुर। सपा विधायक नसीम सोलंकी और उनके पति पूर्व विधायक इरफान सोलंकी एक भागवत कथा में पहुंचे। दोनों ने आशीर्वाद लिया, दक्षिणा भी चढ़ाई। कथावाचक पंडित दीपक कृष्ण महाराज ने नसीम और इरफान को आशीर्वाद दिया।
अभी कुछ दिन पहले नसीम एक मंदिर गईं तो वहां के लोगों ने कहा ये करो, वो करो। किसी के जाने से न मंदिर अपवित्र होता है न तो मंदिर की महिमा कम हो सकती है। लेकिन, मंदिर में तो कोई अपवित्र भी आए तो वो भी पवित्र हो जाता है। कोई पतित भी आए तो वो पावन हो जाता है।
सपा विधायक नसीम ने कहा- आपका हमारा साथ जन्मों तक बना रहे, आप हमारे साथ और हम आपके साथ रहें। इरफान ने कहा- हम सब तो भिखारी हैं, ऊपर वाला एक ही है। कोई अल्लाह तो कोई ईश्वर कहता है। हम सभी धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। हम गुरुद्वारा भी जाते हैं। हम समाज को जोड़ने वाले नेता हैं।
नसीम और इरफान सीसामऊ के गांधी नगर स्थित गणेश पार्क में 7 फरवरी को श्री शनि साईं मंदिर में भागवत कथा के कार्यक्रम में पहुंचे थे।
नसीम सोलंकी ने कहा- जिस तरह से आप लोगों ने उपचुनाव में मेरा साथ दिया, वोट दिया, अपना आशीर्वाद दिया, उसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। मुझे और मेरे परिवार के लिए दुआ करना। हमेशा दुआ में शामिल रखें। आप हमारा परिवार हैं। ये साथ जनम-जनम तक बना रहे। आप हमारे साथ और हम आपके साथ रहें।
इरफान सोलंकी ने कहा- हम सब तो भिखारी हैं, देने के लिए ऊपर वाला है। वो एक है, कोई अल्लाह कहता है, कोई राम कहता है। वो उनकी भी सुनता है, जिनकी जुबान नहीं, उनको भी देता है जिनके हाथ नहीं हैं। बस हमें मांगने की इच्छा रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा- एक दिन हर इंसान को दुनिया से जाना है। बस अगर किसी इंसान के जाने के बाद कोई इंसान उसे याद करके आंसू बहाए तो ये सबसे बड़ी बात है। यहां हाथ खोलकर मांगिए, यही सच्चा दरबार है। वो किसी से लेकर नहीं देता, वो तो सबको अपने खजाने से देता है। सबकी मुराद पूरी करता है, यहां सब मांग सकते हैं।
इरफान ने कहा- ऊपर वाले ने ही हमें पैदा किया, वही पालनहार हैं। ये सच है, पानी में लाठी मारने से पानी अलग नहीं हो जाएगा। हम सब डरपोक हैं, तभी तो उसके दरबार में आए हैं। हमें मालूम है कि हमारी फिक्र करने वाला सिर्फ ऊपर वाला है। उनको कई नाम से बुलाते हैं, कोई अल्लाह कहता है, कोई राम कहता है, देता सिर्फ वही है।
इरफान ने कथावाचक से कहा- गुरुजी मैं इस मंच पर कई बार आया हूं, लेकिन आज सबसे अच्छा मौका मेरे लिए है कि मैं अपनी जीवनसाथी के साथ आया हूं। ये मेरी सुख-दुख की साथी हैं। जब मेरे ऊपर मुसीबत आई, संघर्ष आया तो मेरी मां के बाद सिर्फ मेरी बेगम ने ही मेरा साथ दिया।
परिवार जीवन में बहुत बड़ी चीज है। जब कोई किसी दूसरे के लिए भी ऊपर वाले से मांगता है तो सबसे पहले उसकी दुआ पूरी होती है। इसलिए मेरे लिए, मेरी बेगम के लिए दुआ कीजिए। हमारा आपका साथ ऐसे ही बना रहे।
इरफान सोलंकी ने कहा- हम सभी धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। हम गुरुद्वारा भी जाते हैं। हम समाज को जोड़ने वाले नेता हैं। मेरी पत्नी नसीम को हर समाज के लोगों ने जिताया है।
हमारे प्रयास से समाज जुड़े तो मैं 100 बार ऐसी जगह जाऊंगा, 500 बार जाऊंगा। ऊपर वाला कब किसकी दुआ सुन ले, ये नहीं पता। आज जो मैं जेल से छूटा हूं तो इसमें सबकी दुआ का असर रहा है। कोई मंदिर गया, कोई मस्जिद गया, कोई गुरुद्वारा गया। हम दोनों लोग कथा में गए थे।






