
संवाददाता
कानपुर। देश के प्रचीनतम शहरों में से एक कानपुर जिसकी औद्योगिक पहचान, उसकी सांस्कृतिक समृद्धि और तेज़ी से बदले शहरी ढांचे और परिवहन व्यवस्था आज जिस मुकाम पर खड़ी है, उसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जायसवाल का योगदान यादगार रहेगा। केन्द्र की मनमोहन सिंह सरकार में दस सालों तक कैबिनेट में राज्य व स्वतन्त्र प्रभार के मन्त्री रहे श्रीप्रकाश जायसवाल की दूरदर्शिता, मेहनत और विकास के प्रति समर्पण ने शहर के विकास को नई दिशा और पंख दिए। नगरवासी आज भी उनके कार्यों को विशेषता के साथ याद करते हैं और मानते हैं कि कानपुर की प्रगति की कहानी श्रीप्रकाश के जज़्बे के बिना अधूरी है।श्रीप्रकाश उन लोगों में रहे, जिन्होंने न केवल शहर के बदलते स्वरूप को समझा, बल्कि उसकी ज़रूरतों के अनुरूप योजनाएँ भी तैयार कीं। उनका मानना था कि किसी भी शहर के विकास का आधार केवल इमारतें या सड़कें नहीं, बल्कि वह सोच है जो इन परियोजनाओं के पीछे काम करती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कई विकासात्मक प्रयासों को न सिर्फ दिशा दी, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने में भी अहम भूमिका निभाई।फिर चाहे वो दिल्ली के लिए श्रम शक्ति और मुम्बई के लिए उद्योग नगरी एक्सप्रेस जैसी गतिमान ट्रेनों का संचालन और हवाई नक्शे में नगर को शामिल करवाने की योजना इससे कोई भी शहरवासी भूलने का काम नही कर सकता। यही नही उन्होनें अपने कार्यकाल में ओवर ब्रिज हों या फिर सडकों के चौडीकरण की योजनाओं को अमली जामा पहनाने का काम। साल 2004 से 14 तक की केंद्र सरकार में राहुल और सोनिया गांधी के क़रीबियों में एक रहे श्रीप्रकाश को बड़ी जिम्मेदारी मिलती रही जिसको उन्होंने बखूबी अंजाम तक पहुंचाने का काम किया। साल 1999 में जब बीजेपी की सरकार बनी तो विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने नगर से सीट जीत अपना और पार्टी का परचम बुलंद किया था। उनका सभी वर्गों के लोगों के साथ जुड़ाव उनके मेयर पद पर रहते हुए ही बन चुका था। सरल, सहज और कर्तव्य निष्ठ स्वभाव वाली छवि के कारण लोगों ने उनको संसद तक पहुंचाया। लोगों की उनसे सांसद बनने के बाद जो उम्मीद लगाई थी उसपर वह खरे उतरे।
वह पहली बार जीतकर विपक्ष में रहे फिर उन्होंने 2004 और 2009 में सीट जीतकर केन्द्रीय मन्त्री का पद पाया और राष्ट्रीय राजनीति में नगर के नक्शे को जोड़ने का काम किया। कानपुर की बढ़ती जनसंख्या, ट्रैफिक दबाव, औद्योगिक विस्तार और शहरी जरूरतों के बीच श्रीप्रकाश ने ऐसे समाधान सुझाए, जिन्हें न केवल स्थानीय अधिकारियों ने सराहा, बल्कि उनका प्रत्यक्ष प्रभाव शहर में साफ़ दिखाई दिया। ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार, पार्कों का सुंदरीकरण पुनर्विकास, या सार्वजनिक सुविधाओं में—हर क्षेत्र में उनकी छाप स्पष्ट दिखती है। निवर्तमान उनके दिवंगत होने के बाद उनके करीबी अपने-अपने यादगार पलों को याद कर श्रद्धांजलि दे कर उनके प्रशंसा करते थकते नहीं दिखाई दे रहे हैं। ऐसे ही एक शख्स वरिष्ठ पत्रकार और कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व महामंत्री कृष्ण कुमार त्रिपाठी उर्फ कुमार त्रिपाठी ने अपने और पूर्व मंत्री के बीच बिताए गए पलों को साझा किया जिसमें उन्होंने सबसे सुनहरे और यादगार पल को साझा करते हुए बताया कि कैबिनेट स्तर के मंत्री का प्रभाव भी उन पर कभी भी हावी नहीं रहा। वह जब भी किसी शहर वासी से मिले तो बड़ी आत्मीयता से मिले। फिर उसका चाहे कद उनसे कितना भी बड़ा और छोटा ही क्यों ना रहा हो। कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वह एक बार अपनी ड्यूटी को अंजाम देने के लिए फील्ड पर थे और श्री प्रकाश जी बिना बताए उनके घर पर पहुंच गए जहां उन्होंने उनकी धर्मपत्नी से स्वयं चाय बनाने के लिए किचन में जाने की अनुमति मांगी उनके लाख मना करने के बाद भी वह चप्पल उतार कर किचन में प्रवेश कर गए और अपने हाथ से चाय बनाकर पी और उनकी धर्मपत्नी को भी पिलाई। इस दौरान उनकी सुरक्षा में लगे कर्मी और उनकी टीम के लोग आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने यह भी बताया कि एक बार किसी मंच पर विरोधी उनके पिता के नाम को लेकर गालियों की बौछार कर रहे थे। जब उनको यह जानकारी दी गई तो उन्होंने बहुत ही सरल और सहज अंदाज में उसे अनदेखा कर दिया और शिकायतकर्ता से कहा कि किसी ने आपको कोई चीज दी और आपने नहीं लिए तो यह है फिर से उनके पास वापस चली गई ।आंखों में आंसू और भरभराई आवाज में उन्होंने श्री प्रकाश जी को याद करते हुए बताया कि कानपुर शहर में इससे पहले इस तरह का कोई भी राजनीतिक शख्स दोस्ताना और याराना व्यवहार के लिए पत्रकारों के करीब नहीं रहा। श्री प्रकाश जी उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे ।उनके साथ बिताए हुए पलों को याद करते हुए उन्होंने अश्रुपूरित आंखों से श्रद्धांजलि दी।






