April 29, 2026

संवाददाता
कानपुर।
बिल्हौर के मकनपुर स्थित कुतुबुल मदार दरगाह में सैय्यद बदीउद्दीन जिंदा शाह मदार की गुल पोशी की रस्म पूरी की गई। दरगाह में 7, 8 और 9 नवंबर को 609वें उर्स का आयोजन होगा, जिसकी सभी तैयारियां कमेटी द्वारा पूरी कर ली गई हैं। मकनपुर स्थित कुतुबुल मदार दरगाह में चादरपोशी एक महत्वपूर्ण और पवित्र परंपरा है।
इस रस्म में श्रद्धालुजन संत की समाधि पर एक प्रतीकात्मक कपड़ा, जिसे ‘चादर’ कहा जाता है, चढ़ाते हैं। यह कार्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उनकी श्रद्धा, कृतज्ञता और संत व ईश्वर के साथ गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव को दर्शाता है। यह परंपरा संतों और पवित्र व्यक्तियों के प्रति गहरी श्रद्धा से जुड़ी है, जिन पर ईश्वरीय कृपा और आशीर्वाद माना जाता है।
भक्त अक्सर अपने साथ बारीक कढ़ाई वाली या कीमती कपड़े की चादरें लाते हैं, जिन पर भक्ति और प्रार्थनाओं को व्यक्त करने वाले संदेश लिखे होते हैं।

संत की समाधि पर चादर चढ़ाना समर्पण का प्रतीक है। यह भक्त की अपनी आशाओं, आशंकाओं और आकांक्षाओं को संत के चरणों में समर्पित करने की इच्छा को दर्शाता है।
ऐसी मान्यता है कि चादर संत के आशीर्वाद और आध्यात्मिक ऊर्जा को अपने में समाहित कर लेती है, जिससे भक्त के जीवन में ईश्वरीय कृपा प्रवाहित होती है। चादरपोशी केवल एक रस्मी प्रथा नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति की एक गहन अभिव्यक्ति है जो भौतिक जगत से परे है।
यह भक्ति, विनम्रता और समर्पण के शाश्वत सिद्धांतों का प्रतीक है। यह संत की चिरस्थायी विरासत और उनके उपदेशों से उनके अनगिनत भक्तों के जीवन पर पड़ने वाले गहन प्रभाव का प्रमाण है जो उनके पवित्र मजार पर सांत्वना और मार्गदर्शन की तलाश में आते हैं। 

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