
संवाददाता
कानपुर। विवेचना में झूठे साक्ष्य देने और किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए झूठा आरोप लगाने से संबंधित आईपीसी की धारा 195 व 211 में अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत याचिका एडीजे–04 की कोर्ट ने खारिज कर दी है। अभियोजन की ओर से तर्क दिया गया कि मुकदमे में बढ़ाई गई धाराएं गंभीर प्रकृति की हैं।
कोतवाली में अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने अखिलेश दुबे व पप्पू स्मार्ट समेत 10 नामजद लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मुकदमे में रंगदारी वसूलने, गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। इससे रंजिश मानकर गिरोह के लोगों ने अखिलेश दुबे के साथ मिलकर उन्हें पाक्सो एक्ट के दो झूठे मुकदमों में फंसा दिया और 10 लाख रुपए रंगदारी मांगी।
एक लाख रुपए संदीप शुक्ला ने दिए, लेकिन इसके बाद भी यह लोग नहीं माने। रंगदारी वसूलने, जान से मारने की धमकी देने के आरोप में अखिलेश व महिला की न्यायिक हिरासत मंजूर हुई थी। विवेचना में झूठे साक्ष्य देने और किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए झूठा आरोप लगाने से संबंधित आईपीसी की धारा 195 व 211 की बढ़ोत्तरी की गई है। जिस पर कोर्ट ने 12 सिंतबर को दोनों धाराओं में न्यायिक रिमांड मंजूर की थी।
अखिलेश दुबे की ओर से एडीजे–4 की कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। आरोपी की ओर से कहा कि उसे फर्जी मुकदमे में फंसाया गया है। पुलिस की ओर से षडयंत्र बनाकर छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है।
अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि मुकदमे में बढ़ाई गई धाराएं गैरजमानती है। कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है।






