
संवाददाता
कानपुर। लक्ष्मीपत सिंघानिया इंस्टीट्यूट आफ कार्डियोलॉजी एंड कार्डियक सर्जरी संस्थान में हार्ट ट्रांसप्लांट यूनिट स्थापित होनी थी, लेकिन शासन को भेजे गए प्रस्ताव के बाद अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस कारण उत्तर प्रदेश के लोगों को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। कार्डियोलॉजी संस्थान ने दोबारा विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेजने की तैयारी कर ली हैं।
कार्डियोलॉजी संस्थान के डायरेक्टर डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि यहां पर हार्ट ट्रांसप्लांट सेंटर बनाने को लेकर नवंबर 2024 के आसपास एक प्रपोजल बनाकर शासन को भेजा गया था। हमें उम्मीद है कि जल्दी इस पर कोई ना कोई निर्णय आएगा, लेकिन हम लोग एक बार फिर से प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
इस बार विस्तृत रूप से इस प्रपोजल को तैयार किया गया है, जिसको जल्द ही शासन के समक्ष भेजा जाएगा।
डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा है। कम से कम पांच चरणों में इसको बनाया जाएगा। पहला चरण 100 से 1500 करोड़ का होगा। इसके बाद दूसरा चरण उससे थोड़ा कम लागत में होगा, लेकिन दो चरण में सिर्फ कंट्रक्शन का काम ही हो पाएगा।
इसके बाद तीसरे चरण में फिनिशिंग का काम होगा और फिर चौथे चरण में उपकरणो पर काम किया जाएगा। पांचवें चरण में ये पूरी तरह से कंप्लीट हो पाएगा। ये करीब 12 माले की बिल्डिंग होगी।
डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए सबसे बड़ा हब साउथ इंडिया है और इसके बाद दिल्ली। इन जगहों पर बहुत अस्पताल ऐसे हैं जहाँ लोग ये काम कर रहे हैं। वहां पर जागरूकता भी बहुत है।
इसलिए सबसे पहले हम लोगों को यूपी के अंदर लोगों को जागरूक करना होगा। इसके लिए एक पूरा प्लान तैयार किया जा चुका है, जैसे ही शासन की तरफ से हरी झंडी मिलेगी वैसे ही हम इस काम पर लग जाएंगे।
डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि वर्तमान समय में इस अस्पताल में लगभग 18 जिलों के मरीज ओपीडी में आते हैं। रोजाना 12 सौ से 15 सौ की ओपीडी चल रही है। इसमें रोजाना कम से कम दो व्यक्ति ऐसे आते हैं, जिनको हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है।
अगर इस यूनिट की स्थापना यहां होती है तो लोगों को दिल्ली और साउथ की तरफ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि उससे कम पैसों में ही यहां पर उनका हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा।
डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि अभी यूपी में हार्ट ट्रांसप्लांट को लेकर इतनी जागरूकता नहीं है। अगर आप साउथ की तरफ जाएं तो वहां पर इसको लेकर काफी जागरूकता है और लोग इस पर काफी काम भी कर रहे हैं।
फिलहाल हम लोग, जनता को समय-समय पर जागरूक करते रहते हैं, लेकिन जब सेंटर बनाने को लेकर हरी झंडी मिलेगी तो हम लोग जागरूकता कार्यक्रम पर तेजी से काम करने लगेंगे।






