March 7, 2026

कानपुर। लखनऊ केजीएमयू की नर्सिंग ऑफिसर से फर्जी जज बनकर मेट्रोमोनियल साइट पर युवक ने शादी का प्रस्ताव रखा। इसके बाद लग्जरी कार के नाम पर 59.50 लाख रुपए ठग लिए। फिर कानपुर में युवती को छोड़कर भाग निकला। लखनऊ निवासी युवती ने कानपुर के कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
पुलिस को प्राथमिक जांच में आरोपी के गाड़ी का नंबर और मोबाइल नंबर समेत अन्य सबूत मिले हैं। पुलिस की मानें तो जल्द ही आरोपी को अरेस्ट करके जेल भेजा जाएगा।
लखनऊ की रहने वाली युवती केजीएमयू में नर्सिंग ऑफिसर है। नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि मेरे पिता ने मेरी शादी के लिए मेट्रोमोनियम साइट पर फरवरी में विज्ञापन दिया था। विज्ञापन देखकर एक व्यक्ति ने मेरे पिता से संपर्क किया और खुद को आजमगढ़ में जज के पद पर तैनात वाराणसी निवासी अंशुमान विक्रम सिंह बताया। उसने अपनी वर्तमान तैनाती सिविल जज जूनियर डिवीजन आजमगढ़ बताया। शातिर ने अपनी बातों से पिता को इंप्रेस किया। पिता को भरोसे में लेते हुए शादी के लिए हामी भरवाकर मेरा नंबर हासिल कर लिया। उसके जज होने के चलते मैंने भी उसका बायोडाटा देखा और हामी भर दी।
इसके बाद मेरे पास जुलाई की शुरुआत में उसका फोन आया। उसने खुद को अंशुमान विक्रम सिंह एसीजे जूनियर डिवीजन सीतापुर बताया। पिता के जरिए संबंध की पहले से जानकारी होने के चलते मैंने भी बात शुरू कर दी। शातिर ने धीरे-धीरे बात शुरू की। फिर मेरा भी भराेसा जीत लिया। इसके बाद दोनों के बीच शादी को लेकर सहमति भी बन गई। लेकिन, मेरे पिता ने जब भी उससे बात करके घर आने और शादी संबंध की बात कही तो वह बहाने बनाकर टाल जाता था।

नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि बातचीत के दौरान जुलाई के आखिरी सप्ताह में शातिर ने 1 करोड़ की कीमत वाली लग्जरी कार खरीदने की बात कही। बातों ही बातों में उसने मेरी आर्थिक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर ली थी। इसके बाद उसने कहा कि मैं एक सरकारी न्यायिक अधिकारी हूं। अगर एक करोड़ की गाड़ी खरीदी और पैसों का हिसाब नहीं दे पाया तो फंस जाऊंगा।
उससे बातचीत करते-करते इतना लंबा समय हो गया था कि मैं उससे भावनात्मक तरीके से जुड़ गई थी। इस वजह से मैंने बताया कि मेरी सैलरी से सेविंग की गई 14 से 15 लाख रुपए बैंक अकाउंट में है। मैं उसे कार खरीदने के लिए मदद कर सकती हूं।
इस पर उसने कहा कि मैं जिस पद पर हूं तुम्हारा चंद घंटे में ही अपने प्रभाव से 1 करोड़ का लोन करा सकता हूं। कुछ समय बाद तुम्हारे पूरे पैसे लौटा दूंगा। अब तो हम लोगों को एक साथ ही पूरी जिंदगी बितानी है। कुछ समय में हम लोगों की शादी भी पक्की हो जानी है। मैं उसकी बातों में आ गई और हामी भर दी।
नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि शातिर ने एक लखनऊ के व्यक्ति सीमांत अग्रवाल का मोबाइल नंबर दिया। इसके बाद अपने अकाउंट से पूरी रकम निकालकर घर पर रखने को कहा। क्योंकि लोन के ओटीपी आने पर धोखाधड़ी होने की संभावना जताई। इसके चलते मैंने अपने अकाउंट से 30 जुलाई को 13 लाख रुपए और 4 अगस्त को 1 लाख रुपए कैश निकाल लिया।
रक्षाबंधन वाले दिन 9 अगस्त 2025 को सीमांत अग्र‌वाल लखनऊ स्थित घर आया और लोन के सभी जरूरी दस्तावेज देने को कहा। मैंने अपना पैन कार्ड, आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेजो की कॉपी, फॉर्म-16 और पे-स्लिप, बैंक स्टेटमेंट समेत सभी जरूरी दस्तावेज उसे उपलब्ध करा दिया।
इसके बाद अंशुमान विक्रम सिंह ने कहा कि मोबाइल पर जो भी ओटीपी आए उसे शेयर कर देना। इसके बाद इंडियन बैंक और आईसीआईसीआई बैंक अकाउंट में कुल 44 लाख 54 हजार रुपए आ गए। इसके बाद उसने कहा कि वह पहले वाराणसी और फिर कानपुर जाएगा।
मैंने 1 सितंबर को 6 लाख, 4 सितंबर को 20 लाख और 4 सितंबर को 19.50 लाख रुपए निकाला। इन 59.50 लाख रुपयों को नीले बैग में रखकर 7 सितंबर 2025 को चारबाग बस अड्‌डे से दोपहर 2 बजे चलकर रोडवेज बस से रुपयाें से भरा बैग लेकर कानपुर झकरकटी बस अड्‌डे पर शाम 4 बजे पहुंची।
खुद को अंशुमान विक्रम सिंह बताने वाले ने 7 सितंबर को ही लखनऊ से कानपुर पहुंचने के बाद चुन्नीगंज बस अड्‌डा शनिदेव मंदिर के पास आने के लिए कहा। 

नर्सिंग ऑफिसर ने बताया कि मैं रैपिडो कार से बस अड्‌डे से सीधे चुन्नीगंज शनिदेव मंदिर पर पहुंच गई। वहां पर वह बड़ी गाड़ी से पहुंचा था। उसने रुपयों से भरा बैग अपनी कार में रखवाया और मुझे भी बैठा लिया।
इसके बाद उसने रेव-थ्री मॉल चलने के लिए कहा। मॉल के बाहर गली में अपनी कार खड़ी कर दी और नीले रंग का बैग जिसमें 59.50 लाख रुपए रखे हुए थे, गाड़ी में छोड़कर पैदल ही रेव-थ्री मॉल पहुंचे। उसने फिल्म की दो टिकट खरीदी और दोनों मूवी देखने के लिए हॉल में पहुंच गए। इस दौरान मुझे काफी घबराहट हो रही थी, इस वजह से हम लोग 20 मिनट में ही मूवी हॉल से बाहर आ गए।
शातिर ने मुझे रोका कि तुम यहीं पर रुको और मैं गाड़ी लेकर आता हूं। इसके बाद वह वापस लौटकर नहीं आया। पहले तो जाम का बहाना बनाता रहा और फिर एक बुलेट के शोरूम के पास बुलाया। इसके बाद उसने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया।
जब मुझे ठगी का एहसास हुआ, तब मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। मैं इस घटना से सदमे में पहुंच गई और रातभर कानपुर सेंट्रल स्टेशन के वेटिंग हॉल में बैठी रही। इसके बाद ट्रेन से लखनऊ अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरे मामले की जानकारी दी।
इसके बाद नर्सिंग ऑफिसर अपने पिता के साथ कानपुर पहुंची। दोनों ने मिलकर पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी । पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शातिर के गाड़ी नंबर, मोबाइल नंबर समेत अन्य सबूतों के आधार पर तलाश की जा रही है। जल्द ही शातिर ठग को अरेस्ट करके जेल भेजा जाएगा।