
संवाददाता
कानपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के एडवांस्ड सेंटर फॉर मटेरियल्स साइंस ने मटेरियल साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के साथ मिलकर 11 सितंबर 2025 को एटम प्रोब टोमोग्राफी पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया।
इस कार्यशाला में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें छात्र, शोधार्थी, तकनीकी स्टाफ, संकाय सदस्य और उद्योग से जुड़े प्रोफेशनल्स शामिल थे। इस कार्यशाला का उद्देश्य एपीटी की समझ को बढ़ाना और आईआईटी मद्रास में स्थित नेशनल फैसिलिटी ऑफ एटम प्रोब टोमोग्राफी तक पहुँच को प्रोत्साहित करना था, जिसे आईआईटी कानपुर के एसीएमएस नोडल सेंटर के माध्यम से समन्वित किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्घाटन सत्र प्रो. नीरज चावके, प्रो. अनीश उपाध्याय और प्रो. कांतेश बलानी के संबोधनों के साथ आरंभ हुआ।
प्रो. उपाध्याय ने एसीएमएस के योगदान और उसकी भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें उन्होंने बताया कि यह केंद्र न केवल आईआईटी कानपुर बल्कि पूरे वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है। उन्होंने कहा कि एसीएमएस का उद्देश्य शोधकर्ताओं को उन्नत तकनीकों और विशेषज्ञता के साथ सशक्त बनाना है, ताकि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके और देश की वैज्ञानिक क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
प्रो. कांतेश बलानी ने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस अनूठे अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और सक्रिय रूप से भाग लें।
तकनीकी सत्र में भारत और विदेशों के तमाम विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिए गए। डॉ. हीना खांचंदानी ने एपीटी की मूल बातें और उसके अनुप्रयोगों को प्रस्तुत किया। डॉ. अरुण देवराज ने चरम परिस्थितियों में उपयोग होने वाली सामग्रियों की सूक्ष्म स्तर पर जाँच पर चर्चा की।
इसी तरह से डॉ. सुरेन्द्र माकिनेनी ने नई पीढ़ी की संरचनात्मक मिश्रधातुओं के विकास में इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और एपीटी की भूमिका को रेखांकित किया।
डॉ. से-हो किम, cकोरिया यूनिवर्सिटी, दक्षिण कोरिया ने सामग्रियों की डिज़ाइन में एपीटी के योगदान को बताया और डॉ. रामास्रीनिवास वरनासी,तोहोकू यूनिवर्सिटी, जापान ने मीडियम मैंगनीज स्टील्स में डिफेक्ट-असिस्टेड फेज़ ट्रांसफॉर्मेशन की विस्तृत जानकारी दी।
प्रतिभागियों ने एसीएमएस के एनएफएपीटी -आईआईटीके नोडल फैसिलिटी और अन्य उन्नत रिसर्च सुविधाओं का भी दौरा किया, जिससे उन्हें आईआईटी कानपुर की अत्याधुनिक कैरेक्टराइज़ेशन टेक्नोलॉजी को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिला।
कार्यशाला का समापन समारोह छात्र स्वयंसेवकों – अनिकेत द्विवेदी, पुष्पेन्द्र दोहरे और रवींद्र अग्रिहोत्री – और समर्पित एसीएमएस स्टाफ के योगदान को सराहते हुए संपन्न हुआ, जिनकी मेहनत और सहयोग से यह आयोजन सफल हो सका।
यह कार्यशाला न केवल वैश्विक विशेषज्ञों और युवा शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाने का अवसर बनी, बल्कि इसने आधुनिक कैरेक्टराइज़ेशन टूल्स के माध्यम से सामग्री विज्ञान को आगे बढ़ाने में आईआईटी कानपुर की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया। इसने प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी और कौशल प्रदान किए, जो उन्हें अकादमिक और औद्योगिक क्षेत्रों में वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने में मदद करेंगे।






