May 23, 2026

संवाददाता 
कानपुर।  ग्रामीण क्षेत्रों में दिन के समय भी स्ट्रीट और हाई मास्ट लाइटें जलती हुई देखी जा रही हैं। एक ओर जहां शासन-प्रशासन ऊर्जा संरक्षण और बिजली के सीमित उपयोग की अपील कर रहा है, वहीं यह स्थिति ऊर्जा की बर्बादी को दर्शाती है। बिजली विभाग के अभियंता और उनकी टीम ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर की ओवरलोडिंग की निगरानी करके  आपूर्ति सुचारु रखने का प्रयास कर रही है, लेकिन दिन में जलती लाइटें उनके प्रयासों को प्रभावित कर रही हैं।
विद्युत उपखंड केंद्र शिवराजपुर से संबद्ध गांवों में विभिन्न निकायों से ये लाइटें लगाई गई हैं। हाई मास्ट लाइटों में पोल से स्विच कनेक्ट करने की सुविधा है, लेकिन ग्रामीणों की उदासीनता के कारण वे अक्सर अनावश्यक रूप से जलती रहती हैं। वहीं, स्ट्रीट लाइटों को सीधे विद्युत पोल से जोड़ा गया है, जिससे इन्हें बंद करने की कोई व्यवस्था नहीं है। बिजली आपूर्ति होने पर ये दिन-रात जलती रहती हैं।
इस लापरवाही से न केवल ऊर्जा की बर्बादी हो रही है, बल्कि स्ट्रीट लाइटें भी समय से पहले खराब हो रही हैं। सुनील विश्वकर्मा ने बताया कि शिवराजपुर क्षेत्र के प्रत्येक गांव में औसतन तीन से चार हाई मास्ट लाइटें और पर्याप्त संख्या में स्ट्रीट लाइटें स्थापित हैं। औसतन एक हाई मास्ट लाइट पर लगभग 200 वॉट ऊर्जा की खपत होती है। प्रकाश की आवश्यकता न होने पर भी इनका जलते रहना क्षेत्र स्तर पर बड़ी ऊर्जा बर्बादी का कारण है। इससे गर्मी में ट्रांसफार्मर पर ओवरलोड का खतरा बढ़ जाता है, जिससे आग लगने या फटने जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
अभियंता ने जानकारी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित जिम्मेदारों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। उन्हें स्ट्रीट लाइटों के कंट्रोल स्विच एक जगह करने की सलाह दी जाएगी, ताकि आवश्यकतानुसार उनका सदुपयोग किया जा सके। साथ ही, स्थानीय लोगों को बिजली के सदुपयोग और ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर भी बल दिया जाएगा।

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