
संवाददाता
कानपुर। हृदय रोगों के इलाज में आईआईटी कानपुर ने दो बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। मेहता फैमिली सेंटर फॉर इंजीनियरिंग इन मेडिसिन के पीएचडी शोधार्थी तमोजीत सांत्रा ने प्रो. संतोष के. मिश्रा के मार्गदर्शन में एक बायोसेंसर और बायोडिग्रेडेबल स्टेंट विकसित किया है।
एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमना बिना लक्षण के बढ़ता है। तमोजीत का पॉलीमेरिक बायोसेंसर रक्त की सिर्फ कुछ बूंद से ही बीमारी की शुरुआती अवस्था पकड़ लेता है। अब तक बाजार में मौजूद तकनीक हार्ट अटैक या थक्का बनने के बाद ही जांच कर पाती थीं।
इस बायोसेंसर को भारत सरकार से पेटेंट मिल चुका है। लागत कम रखकर बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए कंपनियों से बातचीत चल रही है।
तमोजीत ने प्राकृतिक पदार्थों से बना 3डी-प्रिंटेड बायोडिग्रेडेबल स्टेंट भी तैयार किया है। धातु के स्टेंट शरीर में हमेशा बने रहते हैं और काम न करने पर नई समस्या देते हैं। आईआईटी का यह स्टेंट शरीर में धीरे-धीरे खुद ही घुल जाएगा। इसे मरीज की जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड डिजाइन में बनाया जा सकेगा। इसका परीक्षण आईआईटी में पशु मॉडल पर किया जा रहा है।
इस शोध में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग और अन्य शोध केंद्रों का सहयोग है।
कोलकाता में पले-बढ़े तमोजीत के पिता शिक्षक थे। जीवविज्ञान का रुझान उन्हें परिवार से मिला। वो एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, चेन्नई से बायोटेक्नोलॉजी से बीटेक में यूनिवर्सिटी टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रहे। इसके बाद उन्होंने जादवपुर विश्वविद्यालय से बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में एमटेक किया।
वह प्रधानमंत्री रिसर्च फेलोशिप के तहत यह काम कर रहे हैं। अब तक 4 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोधपत्र पेश कर चुके हैं और 3 पुरस्कार मिले हैं, जिनमें थर्मो फिशर साइंटिफिक अवॉर्ड भी शामिल है।






