
संवाददाता
कानपुर। बिठूर में गंगा किनारे स्थित ब्रह्मा खूंटी को लेकर धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक तीनों तरह की मान्यताएं जुड़ी हैं। इसे सृष्टि का केंद्र बिंदु भी माना जाता है।
पंडित रवि शंकर शुक्ला के अनुसार विष्णु जी ने ब्रह्मा जी से कहा था कि वे पूरी दुनिया का भ्रमण करें। भ्रमण के बाद ब्रह्मा जी को पता चला कि सृष्टि का केंद्र बिंदु यहीं है। इसके बाद उन्होंने इसी स्थान पर 99 बार यज्ञ किया।
मान्यता है कि यहीं राजा मनु और रानी शतरूपा की उत्पत्ति हुई और यहीं से सृष्टि का आरंभ हुआ।
ब्रह्मा जी की खड़ाऊं के अंगूठे में लगी कील ही यहां ब्रह्मा खूंटी कहलाती है। पुष्कर में ब्रह्मा जी की मूर्ति की पूजा होती है, जबकि बिठूर में उनके चरण पादुका की पूजा की जाती है।
कहा जाता है कि 99 यज्ञ पूरे होने के बाद जब ब्रह्मा जी जाने लगे तो मनु-शतरूपा के आग्रह पर उनकी दाहिने पैर की खड़ाऊं यहीं धंस गई थी।
स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां माता सीता के रहने और लव-कुश के युद्ध से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि उस समय इस्तेमाल किए गए तीर आज भी मंदिरों में रखे हैं।
अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़कर जिस खूंटे से बांधा गया था, उस स्थान के मौजूद होने की भी मान्यता है।
श्री तीर्थ पुरोहित गंगा सभा कमेटी के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने बताया कि गंगा का जल हर साल खूंटी को स्पर्श करने आता है। खूंटी के डूबने की भी अलग मान्यता है।
उनका कहना है कि जिस दिन मंदिर पूरी तरह गंगा के पानी में डूब जाएगा, उस दिन कानपुर में बाढ़ आ जाएगी। ब्रह्मा खूंटी तक पहुंचने वाला गंगा का पानी बिठूर के लोगों के लिए नदी के बढ़ते जलस्तर का अहम संकेत बन जाता है।
इन दिनों ब्रह्मा खूंटी मंदिर के अंदर घुटनों तक पानी भरा हुआ है । इसके बावजूद श्रद्धालु पानी में होकर दर्शन करने पहुंच रहे है। पुजारी ऊंचे स्थान पर बैठकर पूजा कर रहे है ।
ब्रह्मा खूंटी के दर्शन के लिए अलग-अलग जिलों से श्रद्धालु आते हैं। पहले विदेशी पर्यटक भी यहां आते थे, लेकिन अब लोगों की आवाजाही कम हो गई है।
सावन में जब गंगा यहां तक पहुंचती है तो लोगों की नजर सिर्फ आस्था पर नहीं, बल्कि बाढ़ के खतरे पर भी रहती है।






