May 13, 2026

संवाददाता
कानपुर।  पहले अमेरिकी टैरिफ की मार और फिर मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध ने कारोबार की कमर तोड़ रखी थी, और अब रही-सही कसर इटली के कारोबारियों की छुट्टियों ने पूरी कर दी है। शहर और प्रदेश के निर्यातकों के लिए पिछला एक साल किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं रहा है।
इटली के कारोबारी इस बार तय समय से पहले ही एक महीने की लंबी छुट्टी पर जा रहे हैं, जिसका सीधा असर कानपुर सहित पूरे देश के करोड़ों रुपए के एक्सपोर्ट ऑर्डर्स पर पड़ने वाला है।
आमतौर पर इटली में हर साल अगस्त के महीने में बाजार बंद रहते हैं और लोग छुट्टियों पर जाते हैं। लेकिन इस बार वहां के कारोबारियों ने जुलाई में ही काम बंद करने का फैसला लिया है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से एक्सपोर्ट का पहिया लगभग 100 दिनों के लिए पटरी से उतर सकता है।
कानपुर की चमड़ा कारोबारी प्रेरणा वर्मा का कहना है कि एक महीने तक काम न होने से मुश्किलें तो बढ़ेंगी ही, साथ ही पेमेंट भी अब एक महीने बाद ही रिलीज हो पाएंगे। निर्यातकों के पास अब इंतजार के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए अब भारतीय निर्यातकों को इटली पर निर्भरता कम करनी होगी। उन्हें अब यूरोप के अन्य देशों की ओर अपना रुख करना होगा ताकि कारोबार को गति मिल सके। हालांकि, राहत की बात यह है कि जनवरी में भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ हुआ है, जिससे भविष्य में संभावनाएं बेहतर हैं, लेकिन फिलहाल 3 महीने का संकट गहरा दिख रहा है।
वैश्विक मंदी और युद्ध के हालातों ने दुनिया भर के बाजारों को डरा दिया है। फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल का कहना है कि मिडिल ईस्ट वॉर की वजह से कई देश अपने व्यापार को बहुत सावधानी से यानी ‘कछुआ चाल’ से चला रहे हैं। ऐसे में उन्होंने सलाह दी है कि निर्यातकों को अब ‘इन-हाउस ट्रेड’ यानी घरेलू व्यापार पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ताकि वैश्विक झटकों का असर कम किया जा सके।
उत्तर प्रदेश और खासकर कानपुर से बड़ी मात्रा में लेदर उत्पाद, फुटवियर, केमिकल, इंजीनियरिंग और गारमेंट्स इटली भेजे जाते हैं। इटली के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं, लेकिन एक महीने की यह छुट्टी एक्सपोर्टर्स के करोड़ों रुपए के माल को होल्ड पर डाल देगी। जब तक वहां बाजार दोबारा नहीं खुलते, तब तक नए ऑर्डर्स और शिपमेंट का काम ठप ही रहेगा।

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