June 20, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  बाढ़ से निपटने के लिए अब जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। इसके लिए 26 जून को उन इलाकों में मॉक ड्रिल करके अपनी तैयारियों को प्रशासन परखेगा। इसके अलावा बाढ़ आने की स्थिति में राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित निकालने व अन्य स्थितियों से निपटने का अभ्यास किया जाएगा।
एडीएम फाइनेंस विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि हर परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम लगभग पूरे हो चुके हैं। बाढ़ आने की स्थिति में जिन-जिन चीजों की आवश्यकता पड़ती है उन चीजों को तैयार किया जा चुका है।
अब हम लोग मॉक ड्रिल करके अपनी तैयारियों को और मजबूत करेंगे। इसके लिए 24 जून को एक टेबल मीटिंग भी रखी गई हैं।
आपदा विशेषज्ञ जुगबीर सिंह ने बताया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में संचालित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के आपदा प्रबंधन हेल्प लाइन नंबर 0512-298577 पर कॉल करके किसी भी प्रकार की बाढ़ से संबंधित या अन्य चीजों से संबंधित समस्याओं को बता सकते हैं।
इसके अलावा आपदा प्रबंधन टोल फ्री नंबर 1077 भी जारी किया गया है। यदि किसी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कोई भी समस्या आती है और कोई कॉल करता है तो तुरंत उसकी मदद के लिए टीम को मौके पर भेजा जाएगा।
जुगबीर सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में हर साल की तरह इस साल भी 35 बाढ़ राहत चौकी बनाई गई हैं। संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने चौकी का निरीक्षण भी कर लिया है। इसके अलावा व्यक्तिगत 21 गोताखोर लगाए गए हैं। लगभग 90 नाविक लगाए गए हैं। ये नाविक शहर के विभिन्न घाटों पर 24 घंटे उपलब्ध रहेंगे।
उन्होंने बताया कि सभी गोताखोर और नाविक की एक लिस्ट तैयार की गई हैं। इसमें उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखा गया है। किसी भी समस्या पर इन लोगों को तुरंत सूचना देकर मौके पर भेजा जाएगा।
जुगबीर सिंह ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अलग-अलग डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। अगर कोई समस्या होती है तो ये लोग तुरंत वहां पहुंच कर सहायता पहुंचाएंगे।
घाटमपुर, कल्याणपुर ब्लॉक डेंजर जोन में आते हैं। यहां के लगभग 35 गांव बाढ़ से प्रभावित रहते हैं। बाढ़ आने पर लोगों को ऊंचे स्थान पर बने प्राथमिक विद्यालयों में ठहराया जाता है।
जुलाई से लेकर अगस्त तक नदियों में बाढ़ आती है। इस दौरान एक महीना तक गंगा किनारे रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विभाग की ओर से हर वर्ष इन क्षेत्रों में आपदा राहत किट भी बांटी जाती है।
जुगबीर सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को इस बार दोनों टाइम भोजन व नाश्ता की व्यवस्था की जाएगी। इस बार किट में दो किलो चना, डेटॉल अतिरिक्त रखा गया है। वृद्धों को एक गिलास दूध मिलेगा तो बच्चों को फल दिए जाएंगे।
संबंधित एसडीएम और तहसीलदार बाढ़ क्षेत्र के पीड़ितों की रहने, खाने की व्यवस्था कराते हैं। राहत किट में 26 प्रकार की सामग्री होंगी। पिछले वर्ष राहत किट में 18 सामग्री रखी गई थीं।
वहीं एडीएम फाइनेंस विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली खाद्य सामग्रियों को लेकर इस बार सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। किट वितरण के लिए फर्म का चयन हो चुका है। 

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