
संवाददाता
कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के अंतर्गत पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सेवा योजना विश्वेश्वरैया यूनिट-4 के संयुक्त तत्वावधान में “अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस–2026” के अवसर पर एक ऑनलाइन आमंत्रित विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का विषय था “आपदाओं एवं जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा एवं उनकी सहनशीलता का निर्माण”।
कार्यक्रम की आयोजन अध्यक्ष डॉ. अंजू दीक्षित एवं संयोजक डॉ. द्रौपती यादव, सहायक आचार्य, पर्यावरण विज्ञान विभाग एवं एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी विश्वेश्वरैया यूनिट-4 ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन तथा सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना है। उन्होंने बताया कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों के बौद्धिक एवं सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. रोहित जिग्यासु, प्रोग्राम मैनेजर, इंटरनेशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ द प्रिजर्वेशन एंड रेस्टोरेशन ऑफ कल्चरल प्रॉपर्टी, रोम, इटली रहे। उन्होंने अपने व्याख्यान में सांस्कृतिक धरोहरों पर जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं के प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि विश्वभर में अनेक ऐतिहासिक स्थल, सांस्कृतिक स्मारक एवं पारंपरिक विरासतें बाढ़, भूकंप, आग, अत्यधिक वर्षा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण संकट का सामना कर रही हैं।
प्रो. जिग्यासु ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर केवल अतीत की पहचान नहीं होती, बल्कि यह समाज की सामूहिक स्मृति, परंपरा एवं सामाजिक स्थिरता का आधार होती है। उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा जलवायु अनुकूलन रणनीतियों को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी, पारंपरिक ज्ञान, वैज्ञानिक तकनीकों तथा सतत विकास नीतियों के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों को साझा करते हुए यूनेस्को, इकरोम, इकोमास तथा अन्य वैश्विक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने छात्रों एवं शोधार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन तथा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं मुख्य संरक्षक प्रो. विनय कुमार पाठक ने अपने संदेश में कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि मानव सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा का भी आधार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाएँ वैश्विक चुनौती बन चुकी हैं, जिनसे निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता एवं सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।कार्यक्रम के दौरान स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक एवं सह-संरक्षक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि जैव विविधता संरक्षण एवं सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा आज के समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा जिससे विद्यार्थियों में पर्यावरणीय चेतना विकसित हो सके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा, प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अंशु यादव, एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. श्याम मिश्रा, विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी, एनएसएस स्वयंसेवक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।





