• बैंक खाते में मिले 60 हजार रुपए।

संवाददाता
कानपुर। रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर से हुई 57 लाख की ठगी मामले में क्राइम ब्रांच की टीम ने सीआईएसएफ सिपाही को जेल भेज दिया। सिपाही ने पूछताछ में बताया कि वह छह माह से इस गोरखधंधे में शामिल है। रुपयों के लालच में वह खाते उपलब्ध कराता था। उसके एक बैंक खाते में 60 हजार रुपये मिले हैं। क्राइम ब्रांच को ऐसे सुराग मिले हैं जिनके तार कंबोडिया से जुड़ रहे हैं। ओडिशा, झारखंड और कानपुर से पकड़े गए लोग तो महज मोहरे हैं।
साथ ही उसने कोलकाता के एक युवक राहुल का नाम और नंबर बताया है। राहुल कंबोडिया में बैठे आकाओं को खाते उपलब्ध कराता था। जिसके बाद उन खातों में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करायी जाती थी। राहुल का मोबाइल नंबर बंद है।
रामबाग में रहने वाले रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर इंडस्ट्रीज भैरव प्रसाद पांडेय ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि साइबर ठगों ने उन्हें फोन किया और पत्नी मीना पांडेय के आधार कार्ड से पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य आतंकी के खाते में 70 लाख रुपए भेजे जाने की बात कहकर गिरफ्तारी का डर दिखाया। बेटे बहू की गिरफ्तारी की बात भी कही।
साइबर ठगों ने वीडियो कॉल करके सेना के शिविर और कैंप का दृश्य दिखाया था। जांच के नाम पर साइबर ठगों ने आरटीजीएस के माध्यम से 57 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए। इस मामले में पांच लोगों को क्राइम ब्रांच ने उठाया था। इनसे पूछताछ के बाद सीआईएसएफ के सिपाही दाऊद अंसारी का नाम सामने आया। क्राइम ब्रांच की एक टीम सिपाही को कानपुर लायी और जेल भेज दिया।
अधिकारियों के मुताबिक सिपाही ने पूछताछ में कोलकाता के एक युवक राहुल का नाम बताया है। क्राइम ब्रांच ने उनके नंबर चेक किए तो फोन बंद मिले। डीसीपी क्राइम ब्रांच श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि सिपाही को जेल भेज दिया गया है।
इस मामले में मास्टर माइंड झारखंड वीरमऊ निवासी राजू ठाकुर के साथ जवाहर नगर का जय प्रकाश, उसके भांजे विनय प्रताप सिंह व शुभांकर सिंह और किदवई नगर के विक्रम सिंह को सीओडी पुल से गिरफ्तार करके क्राइम ब्रांच ने जेल भेजा था। पुलिस के मुताबिक राजू को छोड़कर अन्य आरोपियों ने अपने खाते मुहैया कराए थे। पांच फीसद कमीशन के लालच में आरोपियों ने खाते दिए थे।






