
संवाददाता
कानपुर। दहेज उत्पीड़न के चलते प्रताड़ना और संदिग्ध परिस्थितियों में विवाहिता की मौत मामले में छह साल बाद एएसजे कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए पाँच-पाँच वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
इंदरगढ़, कन्नौज निवासी शशिप्रभा ने अपनी बेटी अनुपम की शादी सरदारपुर, चौबेपुर निवासी अतुल अग्निहोत्री से धूमधाम से की थी। लेकिन कुछ ही महीनों बाद परिस्थितियाँ बिगड़ने लगीं। मायके पक्ष के अनुसार, पति अतुल, ससुर मुन्ना लाल उर्फ कुंवर बहादुर, सास सुनीता और कुछ अन्य परिजन दहेज की मांग को लेकर अनुपम को लगातार प्रताड़ित करते थे।
23 जुलाई 2019 की सुबह अनुपम का शव घर के अंदर फंदे पर लटका मिला। घटना ने मायके पक्ष को स्तब्ध कर दिया। उन्हें विश्वास था कि दहेज के लिए अनुपम की हत्या कर इसे आत्महत्या का रूप दिया गया है। इसी आधार पर चौबेपुर थाने में दहेज हत्या और प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज कराया गया।
पुलिस जांच के बाद पति, सास और ससुर के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। मामला एएसजे कोर्ट पहुंचा, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
डीजीसी डॉ. विजय सिंह के अनुसार, अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि विवाहिता को लगातार प्रताड़ित किया गया और परिस्थितिजन्य साक्ष्य दहेज उत्पीड़न व मृत्यु की पुष्टि करते हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को पाँच वर्ष का सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।






