
संवाददाता
कानपुर। हृदय रोगियों के जब दिल के वाल्व खराब होते हैं, तो अक्सर दिल की धड़कन भी बेकाबू हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और वह अक्सर अचानक बेहोश होकर गिरने लगता है।इन दिल के मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है।
अब तक इसका इलाज काफी जटिल माना जाता था, लेकिन कानपुर स्थित हृदय रोग संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश वर्मा और उनकी टीम ने ‘कॉक्स मेज 4’ तकनीक के जरिए इस मुश्किल को आसान कर दिया है। पिछले तीन सालों में संस्थान ने 120 ऐसे सफल ऑपरेशन किए हैं, जो पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी मिसाल बन गए हैं।
आमतौर पर जब मरीजों के दिल के वाल्व बदले जाते हैं, तो धड़कन की अनियमितता की समस्या बनी रहती है। ‘कॉक्स मेज 4’ तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सर्जन वाल्व बदलने के साथ-साथ दिल के उन खराब फाइबर्स को भी ठीक करते हैं जो धड़कन बिगाड़ते हैं।
इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी और इलेक्ट्रोकोएगुलेशन का इस्तेमाल किया जाता है। आसान भाषा में कहें तो डॉक्टर एक खास तकनीक के जरिए उन तंतुओं को नष्ट कर देते हैं जो दिल के भीतर गलत करंट पैदा कर रहे होते हैं। इससे दिल के बाकी हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और धड़कन फिर से सामान्य लय में आ जाती है।
इस जटिल सर्जरी को समझने के लिए दिल के उन हिस्सों को जानना जरूरी है जहां डॉक्टर प्रक्रिया को अंजाम देते हैं। इसमें सबसे पहले एसवीसी और आईवीसी के पास काम किया जाता है, जो हमारे शरीर के ऊपरी और निचले हिस्से से गंदा खून दिल तक पहुंचाने वाली मुख्य नसें हैं।
इसके अलावा लेफ्ट एट्रियम यानी दिल के ऊपरी बाएं हिस्से और उसके एक छोटे से भाग जिसे एलए एपेंडेज कहते हैं, वहां भी सुधार किया जाता है। अक्सर खून के थक्के यहीं जमते हैं। डॉक्टर इस दौरान पल्मोनरी वेंस को भी आइसोलेट करते हैं। ये वो नसें हैं जो फेफड़ों से शुद्ध खून को दिल तक लाती हैं। साथ ही दिल के ऊपरी दाएं हिस्से यानी राइट एट्रियम में भी विशेष तरीके से उपचार किया जाता है। यह पूरा तालमेल ही दिल की धड़कन को दोबारा पटरी पर लाता है।
डॉ. राकेश वर्मा ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण केस का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में एक ऐसे मरीज का सफल ऑपरेशन किया गया जिसका दिल फैलकर बहुत बड़ा हो गया था। डॉक्टरों ने एक ही सत्र में मरीज का वाल्व बदला, उसके बढ़े हुए दिल के आकार को काटकर छोटा किया और साथ ही रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए धड़कन को भी सामान्य किया।
यह ऑपरेशन न केवल सफल रहा बल्कि मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अपना जीवन जी रहा है।
डॉ.राकेश वर्मा के मुताबिक, यह आधुनिक तकनीक वर्तमान में उत्तर प्रदेश के किसी अन्य अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। पूरे देश में भी केवल कुछ गिने-चुने विशेषज्ञ ही इस सर्जरी को करने में सक्षम हैं। संस्थान में एमसीएच के छात्र भी पिछले तीन वर्षों से इस विषय पर शोध कर रहे हैं।
इस सफलता के परिणाम इतने उत्साहजनक हैं कि अब गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे बड़े राज्यों की ओर भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी।






