April 20, 2026

संवाददाता 
कानपुर।
साइबर ठगों को म्यूल अकाउंट मुहैया कराने वाले दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी करण केसरा और गुलशन पंजाब के रहने वाले हैं। इन अकाउंट में ठगी की रकम जाती थी। ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों से होते हुए दिल्ली के नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में ‘एके ट्रेडिंग’ नाम की फर्जी फर्म के खाते में पहुंचती थी। यह फर्म पंजाब में रहने वाले मोची के नाम पर है। इसमें महज 3 महीने में 80 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ।
इस खाते से जुड़े मामले में यूपी के कई जिलों में 13 एफआईआर दर्ज हैं और एनसीआरपी पोर्टल पर 650 शिकायतें सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, यह अंतर्राज्यीय गिरोह देश के साथ-साथ चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका के लोगों को भी निशाना बना चुका है।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया- 2 जनवरी को नौबस्ता थाने में मेडिकल स्टोर संचालक अमित राठौर ने 12.82 लाख के साइबर फ्रॉड की एफआईआर दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि ठगों ने उन्हें शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने का झांसा देकर एक ग्रुप में लिंक के जरिए जोड़ा।
श्रद्धा शक्ति नाम पर बने वाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के बाद 12.82 लाख निवेश कराए। ठग उन्हें शेयर ट्रेडिंग में मुनाफा दिखाते हुए और अधिक रकम लगाने का जोर देने लगे। कुछ समय बाद एप बंद कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
मामले के खुलासे में साइबर टीम और एसटीएफ टीम जांच में जुटी तो पता चला कि ठगी की रकम सेंट्रल बैंक, एक्सिस, यूनियन, ओवरसीज बैंक के खातों से होती हुई नई दिल्ली के नेशनल अर्बन कॉरपोरेशन के एके ट्रेडिंग फर्म के खाता संख्या 02100216701 में पांचवी लेयर तक ट्रांसफर की गई थी। यह फर्म अबोहर निवासी अजय नाम के युवक की थी।
इसमें 3 माह में 80 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया था, जिसमें यूपी के विभिन्न खातों से 26 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया था। सघन जांच में सामने आया कि इस बैंक खातें के नाम पर यूपी के विभिन्न जनपदों से 13 एफआईआर थी, साथ ही एनसीआरपी पोर्टल पर 650 शिकायतें मिली।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने घटना का खुलासा करते हुए बताया- अकाउंट एके ट्रेडिंग नाम की फर्जी फर्म के नाम पर पंजाब के अबोहर के अजय ने खुलवाया था। अजय पंजाब में मोची का काम करता था। करण केसरा आटो पार्ट्स और गुलशन बिजली मकैनिक है।
एके ट्रेडिंग अकाउंट पर यूपी के गाजियाबाद, नोएडा, सहारनपुर, बारांबकी, आगरा समेत 13 एफआईआर रजिस्टर्ड है। इसके साथ ही एनसीआरपी पोर्टल पर 650 शिकायतें दर्ज हैं। अंतर्राज्यीय साइबर ठगों का गिरोह चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका के लोगों के साथ भी ठगी की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ये ठग शेयर ट्रेडिंग, गेमिंग एप, हनीट्रैप व लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करते थे। करण और गुलशन गिरोह के सरगनाओं को फेक अकाउंट मुहैया कराते थे। इसके एवज में उन्हें खाते में आई रकम का 60 प्रतिशत हिस्सा मिलता था। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह देश भर में ड्रग्स डीलिंग के सिंडिकेट में भी शामिल था।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि पूरे प्रकरण में बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत सामने आई है। ठग करंट अकाउंट का इस्तेमाल करते थे, जिससे ज्यादा से ज्यादा रकम की निकासी की जा सके। पूछताछ में करण ने बताया कि पुलिस जब बैंककर्मियों को खाता होल्ड करने की जानकारी देती थी, तब बैंककर्मी उन्हें इसकी जानकारी दे देते थे, जिस पर ठग भारी मात्रा में रकम की खाते से निकासी कर लेते थे।
जांच में पुलिस को करण के चार सेविंग खाते और उसकी पत्नी के नाम 2 खाते मिले है। सेविंग में भारी भरकम रकम का ट्रांजेक्शन होने पर बीते दिनों इनकम टैक्स ने करण को 3 करोड़ का नोटिस भी जारी किया था। जिस पर करण ने बताया कि उसके परिचित मित्तल ने उसका पैनकार्ड और अकाउंट ले लिया था, जिसके एवज में मित्तल उसे 10 से 15 हजार रुपए हर माह देता था। पुलिस कमिश्नर ने बताया कि करण ने ठगी की रकम से आलीशान मकान और लग्जरी कार भी खरीदी है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ठगों ने करण और गुलशन को कोडवर्क भी दिया था। करण का कोडनेम ‘लिटिल मोंगा’ और गुलशन का कोडनेम ‘कालरा’ रखा गया था। कालरा और लिटिल मोंगा के पास से बरामद आईफोन में कई वाट्सएप ग्रुप भी मिले है, जिनमें विदेशी और भारतीय नंबरों के जरिए से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। ठगी की रकम चेक और एटीएम के जरिए निकाली जाती थी। पुलिस की पकड़ में रकम न आए इसके लिए ठगी की रकम को 5 से 6 लेयर तक घुमाया जाता था।