June 8, 2026

सीएसजेएमयू के रिसर्च में हुआ खुलासा, विज्ञापन बंद तो ग्राहकों का भरोसा भी खत्म।



संवाददाता
कानपुर। बाजार में जब कोई नया प्रोडक्ट या नई टेक्नोलॉजी आती है, तो लोग उसे क्यों और कैसे अपनाते हैं? क्या सिर्फ शुरुआती विज्ञापन ही किसी ब्रांड को सुपरहिट बना सकता है? इन कशमकश भरे सवालों का जवाब कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के एक शोध में गणित के फॉर्मूलों के जरिए खोजा गया है।
विश्वविद्यालय के शोधार्थी स्कंद द्विवेदी ने अपने रिसर्च मैथमेटिकल  मॉडलिंग  ऑफ  इफ़ेक्ट  ऑफ  मीडिया  एंड  पापुलेशन  इंटरक्शन  ऑन  सोशल प्रॉबलम्स  रिलेटेड टु  एडॉप्शन  ऑफ  एन इनोवेशन  में यह साफ किया है कि किसी भी नए बदलाव या प्रोडक्ट की कामयाबी के पीछे मीडिया और सामाजिक संपर्कों का गणित कैसे काम करता है।
अक्सर कंपनियां भारी-भरकम बजट के साथ अपने प्रोडक्ट को लॉन्च करती हैं और फिर शांत बैठ जाती हैं। इस शोध के गणितीय मॉडल ने साबित किया है कि यह रणनीति पूरी तरह फेल है। किसी भी ब्रांड या विचार को बाजार में टिकाए रखने के लिए सतत विज्ञापन और लगातार दृश्यता सबसे जरूरी है।
जैसे ही किसी ब्रांड का प्रचार और बाजार में उसकी मौजूदगी कमजोर पड़ती है, ग्राहकों का उस पर से भरोसा और जुड़ाव भी धीरे-धीरे घटने लगता है। यानी बाजार का सीधा नियम है। जो दिखेगा, वही टिकेगा।
आज के समय में इलेक्ट्रिक व्हीकल एक बड़ा नवाचार है, लेकिन आम जनता अब भी इसे पूरी तरह अपनाने में हिचक रही है। शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि ईवी जैसे बड़े बदलावों को जनता के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए कंपनियों और सरकार को दीर्घकालिक संचार नीतियां बनानी होंगी।
इसके लिए केवल महंगे विज्ञापन ही काफी नहीं हैं, बल्कि लागत प्रभावी प्रचार रणनीतियों और जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता अभियानों की जरूरत है, ताकि ग्राहक तकनीकी रूप से आश्वस्त हो सकें।
समाज में चलने वाली चर्चाएं और लोगों के आपसी संपर्क किसी भी व्यक्ति के खरीदारी के फैसले को सीधे प्रभावित करते हैं। यह बदलता सामाजिक परिवेश कंपनियों के लिए नए अवसर तो लाता ही है, साथ ही बड़ी चुनौतियां भी खड़ी करता है। जो कंपनियां समाज के इस रुख को भांपकर अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी में लगातार सुधार नहीं करतीं, वे रेस से बाहर हो जाती हैं।
यह शोध केवल किताबी गणित नहीं है, बल्कि नीति-निर्माताओं और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक ऐसी  प्रैक्टिकल गाइडलाइन है, जो उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के सतत आर्थिक विकास को भी रफ्तार दे सकता है।

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