
संवाददाता
कानपुर। तेजी से बढ़ रही गर्मी का असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। गर्मी ने आम आदमी की दिनचर्या को पूरी तरह से प्रभावित किया है।
भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों पर भी साफ नजर आ रहा है। कानपुर चिड़ियाघर में इन दिनों जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
जहां एक ओर बाघ और व्हाइट टाइगर पानी में उतरकर ठंडक का मजा ले रहे हैं, वहीं भालू कीचड़ में लोटकर खुद को ठंडा रख रहा है। चिड़ियाघर में दरियाई घोड़ा 18 घंटे पानी में ही रह रहा है।
पिछले चार दिनों से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के चलते चिड़ियाघर प्रशासन अलर्ट है। जानवरों के बाड़ों में कूलर, स्प्रिंकलर और पानी के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।
जू में दोपहर के वक्त जब पारा करीब 39 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचा, तो टाइगर बघीरा और वाइट टाइगर अपने बाड़े में भोजन करने के बाद धूप से बचने के लिए लकड़ी के बनें मचान की छांव में आराम करते दिखे। बाड़े में पानी के फव्वारों वाले स्प्रिंकलर भी लगे हैं। जब फव्वारे चलते हैं, तो बाघ इधर-उधर टहलना शुरू कर देते हैं।
उसी बाड़े में बाघ के लिए स्वीमिंग पूल बनाया है। कुछ देर बाद टाइगर बघीरा उसमें उतरकर स्विमिंग पूल की तरह आनंद लेते और पानी से खेलते दिखे।इसी तरह वॉइट टाइगर भी पूरे दिन में कई बार ऐसा करता रहता है।
बाड़े के केयरटेकर ने बताया कि गड्ढे का पानी धूप में गर्म न हो, इसके लिए मोटर से लगातार पानी बदला जाता है। टाइगर दिनभर में 7 से 8 बार इस पानी में जाता है, जिससे उसे गर्मी से राहत मिलती है।
भालू पहले अपने बाड़े में पेड़ की छांव में टहलते दिखे, लेकिन ज्यादा गर्मी लगने पर बाड़े के नीचे बने ठंडे पानी और कीचड़ में करीब 35 मिनट तक लोटता रहा। कभी कीचड़ में हाथ-पैर रगड़ते तो कभी लकड़ी के टुकड़े से खेलते नजर आए।
दरियाई घोड़ा 18 घंटे तक पानी से निकल ही नहीं रहा
गैंडा दिनभर दो ही काम करता है, पहला- हरी पत्तियां खाता है और फिर सीधे पानी में चला जाता है। इसके बाद अपने बाड़े में कीचड़ में लेटकर आराम करता है। यही प्रक्रिया बार-बार दोहराता है।
दरियाई घोड़ा ऐसा वन्य जीव है जिसे सबसे ज्यादा गर्मी लगती है।
जू के डॉ. नासिर ने बताया कि दरियाई घोड़ा पूरे दिन में करीब 18 घंटे पानी में ही रहता है और सिर्फ खाने के लिए बाहर आता है।
उन्होंने बताया कि इसके शरीर से निकलने वाला लाल रंग का पसीना ही इसे गर्मी से राहत देता है। यह पसीना 24 घंटे में केवल 2 से ढाई घंटे तक ही निकलता है। यदि यह इससे ज्यादा देर तक पानी से बाहर रहता है, तो इसे डिहाइड्रेशन हो सकता है।
चिड़ियाघर में शेर, भालू और बाघ के बाड़ों में कूलर लगाए गए हैं। जब ये जानवर बाड़े के अंदर जाते हैं, तो कूलर चालू कर दिए जाते हैं, जिससे उन्हें दिन और रात दोनों समय राहत मिलती है
केयरटेकर ने बताया कि कूलर का पानी रोज बदला जाता है और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे। इसी तरह अन्य जानवर जैसे हिरन और बारहसिंघा और जेब्रा के लिए भी बाड़ों में पानी के फव्वारों वाले स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जिससे उन्हें भी गर्मी से राहत मिल रही है।






