
संवाददाता।
कानपुर। प्रदेश में आज बारिश के आसार हैं। मौसम विभाग ने पश्चिमी यूपी के 28 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा पूर्वी यूपी में 30 से 35 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की अनुमान जताया है। औसत से 58% कम बारिश हुई, 20 अप्रैल से से गर्म हवाएं चलेंगी मौसम विज्ञानी डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया, कानपुर मंडल में भी बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, लेकिन यहां बारिश के आसार नहीं है। जबकि पूर्वी यूपी में तेज हवाएं चलती रहेंगी। हालांकि अप्रैल महीने की बात करें तो अभी तक औसत से 58% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। 1 से 18 अप्रैल तक 1.4 मिमी. बारिश ही प्रदेश में हुई है, जबकि औसत बारिश का रिकॉर्ड 3.3 मिमी. का है। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून में अच्छी बारिश के संकेत हैं, लेकिन इस बार अप्रैल महीने से हीटवेव चलना शुरू हो जाएगी। 20 अप्रैल से गर्मी की भीषण तपिश के लिए लोगों को तैयार रहना होगा। पूर्वी यूपी के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला गया है। गर्मी बढ़ने से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पानी की कमी और ऊर्जा की मांग बढ़ सकती है। इको सिस्टम और एयर क्वालिटी प्रभावित होगी। वहीं प्रदेश में वाराणसी सबसे गर्म शहर रहा। यहां अधिकतम तापमान 40.1 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि मुजफ्फरनगर और बस्ती का न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सबसे कम रहा। प्रशासन ने गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। सलाह दी है कि गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना और लगातार पसीना आना। नब्ज अर्थात पल्स का तेजी से चलना। सांस गति में अत्यधिक तेजी का हो जाना। व्यवहार में परिवर्तन यथा भ्रम की स्थिति पैदा होना हीटवेव के लक्षण हैं। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह का होना आदि कारक व्यक्ति को लू लगने की संभावना को बढ़ा देती है। ऐसी कुछ औषधियों जैसे डाययूरेटिक, एंटीस्टिमिनिक और मानसिक रोग की कुछ औषधियों भी मानव शरीर में लू लगने की संभावना को बढ़ा देती है। हीट स्ट्रोक के लक्षण को पहचानें, खूब पानी पीएं कमजोरी, चक्कर आना, सिरदर्द, अधिक पसीना और बेहोशी आना हीट स्ट्रोक के लक्षण हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिख तो डॉक्टर से जरूर सम्पर्क करे। हीट स्ट्रोक से बचने के लिए थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले ढीले वस्त्र पहनें। धूप के चश्में, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें। यदि खुले में काम करने की आवश्यकता हो तो सिर, चेहरा, हाथ और पैरों को कपड़े से ढक कर रहें तथा छतरी का प्रयोग करें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोंछे और डॉक्टर से संपर्क करें। यात्रा करते समय पीने का पानी साथ ले जायें। ओआरएस घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी, नींबू पानी, छाछ आदि का उपयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सके।










