
संवाददाता।
कानपुर। आईआईटी कानपुर और नेशनल ऑटोमोटिव टेस्ट ट्रैक्स ने रियल ड्राइव एमिशन और एमिशन नॉर्म्स ने एक समझौता ज्ञापन में हस्ताक्षर किया है। इस समझौते के बाद अब भविष्य में वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण को रोका जा सकेगा। दोनों संस्थान के विशेषज्ञ प्रदूषण रहित वाहनों के निर्माण पर काम करेंगे और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने में मदद करेंगे। इस समझौता ज्ञापन पर निदेशक डॉ. मनीष जायसवाल और आईआईटी कानपुर के अनुसंधान और विकास के डीन प्रो. तरुण गुप्ता ने हस्ताक्षर किए। प्रो. तरुण गुप्ता ने कहा, सहयोग अकादमिक अनुसंधान और वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोग के बीच सामंजस्य बैठाने का एक अवसर है। स्वच्छ और अधिक टिकाऊ परिवहन समाधानों के लिए वाहन उत्सर्जन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उत्सर्जन अनुसंधान में आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञता की अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं के साथ जोड़कर, हम ऑटोमोटिव उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। इससे हमें भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और ऑटोमोटिव इंजीनियरों और शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी को विकसित करने के लिए सशक्त बनाने में भी मदद मिलेगी। निदेशक डॉ. मनीष जायसवाल ने कहा, “हमारा मानना है कि यह सहयोग ऐसी प्रौद्योगिकियों और प्लेटफार्मों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा जो किसी भी ऑटोमोटिव वाहन के डिजाइन और रियल टाइम टेस्ट विश्लेषण में उद्योग की सहायता कर सकते हैं। ऑटोमोबाइल के भौतिक परीक्षण में तथ्य-जांच, डेटा विश्लेषण और सामग्री क्यूरेशन शामिल होगा। यह साझेदारी ऑटोमोटिव उद्योग द्वारा बनाए गए उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देगी। आईआईटी कानपुर के एमटेक छात्रों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम विकसित किया जाएगा। आईआईटी कानपुर उन प्रमुख संस्थानों में से एक है जो विज्ञान, इंजीनियरिंग, डिजाइन, प्रबंधन और मानविकी के विभिन्न क्षेत्रों में सार्थक शिक्षा प्रदान करने के साथ, उच्चतम मानक पर मौलिक अनुसंधान करता है। देश के औद्योगिक विकास के लिए तकनीकी नवाचार में नेतृत्व करता है।










