कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच आन्तरिक गतिरोध समाप्त होने का नाम ही नही ले रहा यह अब और भी आगे बढ चला है। रौब गांठने के उददेश्य से पदाधिकारी एक दूसरे को अब फूटी आंख नही सुहा रहे है।यही नही एक दूसरे से नाराज पदाधिकारी आला कमान के सामने आने से भी कतराने लगे हैं। यूपीसीए के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक अगर यही हाल रहा तो इस वर्ष की आम सभा से पहले ही कई पदाधिकारियों को उनके पद से मुक्ति भी दी जा सकती है या फिर उनसे जबरन इस्तीफा भी लिया जा सकता है। गौरतलब यह भी है कि लखनऊ के इकाना स्टेेेेडियम में आयोजित करवाए जा रहे आईपीएल मैचों में एक पूर्व सचिव का सिक्का बिना किसी आला और पदाधिकारी की अनुमति के बिना ही चल रहा है।उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के कई कर्मचारी और अधिकारी पूर्व सचिव के नेतृत्व में कार्य करने को इच्छुक दिखायी ही नही दे रहें है। सभी की मंशा है कि पूर्व सचिव को किसी भी प्रकार का प्रभार न मिले क्यों कि प्रभारी रहते ही उनका हिटलर शाही रवैया सभी के प्रति शुरु हो जाता है। यूपीसीए के अन्दर खाने यह चर्चा भी आम है कि पूर्व सचिव किसी के कार्य करने की प्रणाली से जब संतुष्ट ही नही होते तो उनके नेतृत्व में कार्य करने का कोई फायदा नही है। ऐसा भी सुनने में आ रहा है कि वह केवल अपने ही द्धारा नियुक्ति व तैनात किए गए कर्मचारियों की आवाज ही सुनते हैं और उस पर अमल करते हैं। गौरतलब है कि यूपीसीए में पूर्व सचिव के पद पर रहे युद्धवीर सिंह का मेरठ कालेज में नौकरी पाए जाने वाले मामले से शुरुआत हुयी थी। इस कडी में बीती जनवरी में लखनऊ के इकाना में आयोजित मैच के बाद से स्थिति बिगडती ही गयी और अब जाकर मामला बहुत ही गंभीर मोड पर पहुंच गया तो लोगों को अपनी गलती का अहसास हुआ और वह वापस ग्रु्प में लौटने के लिए अर्जी लगाने लगे। संघ के भीतर सदस्यों का मानना है कि आलाकमान के वरदहस्त पाने की वजह से वह सभी पर अपना नियन्त्रण और शिकंजा रखने का सफल प्रयास करते आ रहे हैं। बीते दिनों पूर्व सचिव ने के चलते वह अभी भी बिना पद के ही सभी निर्णय अपने आप ले रहे थे। जिससे संघ में के भीतर पदाधिकारियों के बीच तनातनी बढ़ गई थी। लखनऊ के इकाना स्टेडियम को लेकर घमासान चरम पर पहुंच गया था।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में वर्तमान सचिव के साथ हुए विवाद की खबर छापनें के लिए आला कमान को बिना जानकारी दिए ही दो समाचार पत्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी थी। इस प्रकरण का विरोध भी संघ के भीतर और आलाकमान के कुछ नजदीकी लोगों की ओर से किया गया। हालांकि दबाव पडने के बाद मामले को रफा-दफा करवाने का प्रयास किया गया। यही नही पूर्व सचिव और पदाधिकारियों के बीच इतनी तनातनी बढ गयी है कि शुक्रवार को चेन्नई के खिलाफ हुए मैच से दो दिन पूर्व स्टेेडियम में डेरा डाले बैठै रहे आलाकमान के आने की खबर मात्र से ही बिना किसी को बताए ही वहां निकल लिए। अब कई कर्मचारियों ने यह ठान लिया है कि पूर्व सचिव के नेतृत्व में किसी भी कार्य को अंजाम नही दिया जाएगा अगर इसके लिए संघ से इस्तीफा भी देना पडे तो वह मंजूर होगा। वहीं दूसरी ओर पूर्व सचिव किसी भी कीमत पर संघ के भीतर अपने रुतबे को कम नही होने देना चाहते हैं।यूपीसीए के एक कर्मचारी ने बताया कि पूर्व सचिव संघ को एक विश्वविद्यालय की ही भांति नियन्त्रित करने का काम कर रहें हैं। सूत्र यह भी बतातें हैं कि इससे पहले संघ के भीतर किसी भी पदाधिकारियों के बीच रुतबे को लेकर गतिरोध नही रहा है। अगर एक खेल संघ के भीतर पदाधिकारियों के बीच गतिरोध जारी रहेगा तो आयोजनों में सफलता का प्रतिशत कम नही बल्कि शून्य भी हो सकता है।










