
संवाददाता।
कानपुर। नगर में शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए कानपुर मेडिकल कॉलेज के हैलट अस्पताल में इमीडिएट कंगारू मदर केयर का निर्माण कराया जा रहा है। यहां पर 12 बेड होंगे। खास बात यह है कि इसमें मां और बच्चे दोनों ही साथ में रहेंगे। अभी तक शिशु के पैदा होने पर अगर उसे कोई दिक्कत होती थी तो उसे एनआईसीयू, आईसीयू या वेंटिलेटर में रखा जाता था और मां को कंगारू मदर केयर में, लेकिन अब आईकेएमसी के बनने के बाद शिशु को दो घंटे के अंदर ही मां के पास लाया जाएगा। बशर्ते शिशु वेंटिलेटर पर न हो। कंगारू मदर केयर की शुरुआत बोगोटा, कोलम्बिया में हुई। यहां पर शिशु के मृत्युदर को कम करने के लिए शोध किया गया था। शिशु की देखभाल के लिए यह एक बहुआयामी दृष्टिकोण के हिस्से के रूप में त्वचा से त्वचा का उपयोग शामिल था। जैसा कि एक कंगारू अपने बच्चे को पैदा होने के बाद सीने से लगाकर रखती है, उसी तरह से इस यूनिट में भी मां अपने शिशु को सीने से लगाकर रखती हैं। वहां पर देखा गया कि जब मां अपने शिशु को सीने से चिपका कर लिटाती है तो बच्चा खुद को ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ्य महसूस करता है। इससे बच्चों को संक्रमण भी कम होता था और होने वाली बीमारी से भी वह बच जाते हैं। ऐसे में बच्चे को हापोथेरेपीया भी नहीं होता है। उत्तर प्रदेश में पहला केएमसी हैलट अस्पताल में बनाया गया है। बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ. अरुण आर्या ने बताया कि अभी तक यहां पर केएमसी थी लेकिन अब यहां पर आईकेएमसी भी बनने जा रहा है। यहां पर शिशु को उसकी मां के साथ ही रखा जाएगा। आगामी महीनों में इसे शुरू करने की तैयारी है। इसको समाज सेवी संस्था द्वारा तैयार कराया जा रहा है। इसमें कुल 12 बेड होंगे। हाल ही में दिल्ली के सरोवर पार्क होटल में एक ट्रेनिंग में कानपुर शहर से डॉ. अरुण कुमार आर्या व डॉ. करिश्मा ने भी इसमें हिस्सा लिया था। यहां पर देशों के डॉक्टर शामिल हुए थे। डॉ. आर्या ने बताया कि इसमें बताया गया कि कितनी जल्दी आप डिलीवरी के बाद शिशु और मां को एक साथ मिलाकर बच्चे को संक्रमण से बचा सकते हैं। हम लोगों का प्रयास है कि यदि शिशु गंभीर अवस्था में नहीं है तो उसे मां को दे दिया जाएगा और मां आपने शिशु को सीने के ऊपर लिटा लेंगी। डॉ. आर्या ने बताया कि डिलीवरी के बाद मां को अपने बच्चे को कम से कम 8 घंटे और अधिक से अधिक 24 घंटे उसे अपने सीने से चिपका कर रखना होगा। इस सेंटर के माध्यम से 25 प्रतिशत शिशु मृत्युदर को कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को कोई दिक्कत भी है तो वह मां के पास जाने से ठीक हो जाएगा, लेकिन अगर शिशु को वेंटीलेटर पर रखा गया है तो फिर ऐसी स्थिति में शिशु को नहीं दिया जाएगा। डॉ. आर्या ने बताया कि दिल्ली के सफदरगंज हॉस्पिटल में आईएमकेसी यूनिट बनी है। दिल्ली में प्रशिक्षण के दौरान वहां की यूनिट का भ्रमण करने को मिला। देखा गया कि किस तरह से यूनिट को बनाया गया है। मां और शिशु की सेहत को ध्यान में रखते हुए किस तरह की व्यवस्था अंदर की गयी है, ताकि मां को यूनिट से बाहर न आना पड़े सभी सुविधाएं उसी वार्ड में मिल जाए। आईकेएमसी के अंदर मां और बच्चे के लेटने के लिए सुविधाजनक बेड, वार्ड में ही उनके नहाने और कपड़े बदलने के लिए बाथरुम, इसके अलावा उनकी देखरेख के लिए प्रशिक्षित स्टॉफ रखा जाएगा। कभी-कभी डिलीवरी के बाद मां की स्थिति सही नहीं होती है। ऐसे में फिर मां अपने शिशु को ले पाने में असमर्थ होती है। ऐसी स्थिति में परिवार के ही किसी सदस्य को तैयार किया जाएगा ताकि वह बच्चे को सीने से लगा कर लेट सकें और उस बच्चे को भी अपनी मां का एहसास मिल सके।










