• गायक के इशारे पर बजेगी ताल, मिला पेटेंट।

संवाददाता
कानपुर। आईआईटी कानपुर ने संगीत की दुनिया में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान ने एक ऐसी स्मार्ट तकनीक विकसित की है जो गायक के साधारण इशारों से ही संगीत की संगत को नियंत्रित कर सकती है। इस तकनीक को भारतीय पेटेंट नंबर 568275 भी मिल चुका है।
ये सेंसर आधारित स्मार्ट वर्चुअल आर्केस्ट्रा सिस्टम है। संगीतकार जब किसी निर्धारित गति या ताल में उंगलियों से टैप करता है तो सेंसरयुक्त पोर्टेबल हार्डवेयर अटैचमेंट उसके इनपुट को पकड़ लेता है और वास्तविक समय में उसके अनुरूप परकशन संगत तैयार कर देता है।
इसका मुख्य उद्देश्य संगीतकार और डिजिटल संगत के बीच समय-अंतर को न्यूनतम रखना है ताकि प्रस्तुति के दौरान ताल का समन्वय बना रहे।
आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. विपुल अरोड़ा और शोधकर्ता हिमांशु जिंदल ने इस सिस्टम का विकास किया है। हिमांशु जिंदल ने बताया कि सिस्टम में सेंसरयुक्त पोर्टेबल हार्डवेयर अटैचमेंट का इस्तेमाल किया गया है।
इस तकनीक के पीछे संगीत को कंप्यूटेशनल रूप से मॉडल करने की प्रक्रिया है। इसके लिए अलग-अलग संगीत अवस्थाओं को व्यवस्थित करने के लिए फाइनाइट स्टेट मशीन आधारित मॉडलिंग और ऑडियो सिग्नल के लिए लाइनर टाइम इनवेरिएंट फिल्टर का प्रयोग किया गया है।
शोध में पाया गया कि भारतीय संगीत में संगत सिर्फ एक पैटर्न दोहराने तक सीमित नहीं रहती। वादक प्रस्तुति के दौरान थाप, पैटर्न और ताल में छोटे-छोटे बदलाव करते हैं, जिससे कलाकार की विशिष्टता दिखती है। इसी व्यवहार को डिजिटल रूप में लाने के लिए सिस्टम में स्टोकेस्टिक यानी संभाव्यता आधारित तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है।
यह तकनीक टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल पर पूरी तरह तैयार है। इसका उपयोग संगीत विद्यार्थियों के सेल्फ-प्रैक्टिस, व्यक्तिगत रियाज और संगीत प्रशिक्षण में किया जा सकेगा।






