May 13, 2026

सच्चा रिश्ता हमेशा वैसा ही रहता है।

संवाददाता 

कानपुर।  विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना अपने बचपन के दोस्त और ई-ऑटो चालक राम मनोहर कपूर से मिले और उनके ऑटो में सफर किया। ऑटो में घूमते हुए उन्होंने एक वीडियो भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि पद और प्रतिष्ठा समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते और अपने शहर से जुड़ा लगाव हमेशा वैसा ही रहता है…।
आटो ड्राइवर राम मनोहर कपूर ने कहा- वर्ष 1991 में सतीश महाना के साथ राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया था, जिसके बाद उनकी दोस्ती और गहरी हो गई।
सतीश महाना ने लिखा… ‘‘पद और प्रतिष्ठा समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे रिश्ते और अपने शहर से जुड़ा लगाव हमेशा वैसा ही रहता है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं से थोड़ा समय निकालकर कल पुराने साथी श्याम के साथ वर्षों बाद कानपुर की सड़कों पर ऑटो रिक्शा की सवारी करने का अवसर मिला।
खास बात यह रही कि ऑटो चलाने वाले वही पुराने साथी थे, जिनके साथ बचपन की अनगिनत यादें जुड़ी हुई हैं। वही पुराने दिन, वही अपनापन और वही बेफिक्र मुस्कान आज फिर लौट आई। कानपुर की गलियों में घूमते हुए ऐसा लगा मानो जिंदगी कुछ पल के लिए फिर उसी सुनहरे बचपन में लौट गई हो…।”
जगईपुरवा स्थित आनंद नगर के रहने वाले ई-ऑटो चालक राम मनोहर कपूर ने बताया कि वह ई-ऑटो सिर्फ स्कूली बच्चों के लिए चलाते है। उनके साथ उनकी पत्नी नीता कपूर रहती हैं और कोई संतान नहीं है । उन्होंने बताया कि वह स्कूली बच्चों को छोड़कर घर लौट रहें थे।
इस दौरान चंद्र नगर इलाके में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना अपने कार्यकर्ताओं के साथ “मोदी की झालमुड़ी” का वितरण कर रहें थे। अचानक उनकी नज़र पड़ी तो वह महाना के पास पहुंचे।
महाना ने ई-ऑटो चालक को देखते ही गले लगा लिया। इसके बाद ई-ऑटो में बैठकर लालबंगला बाजार घूमते हुए घर तक गए और उनका काफिला पीछे चल रहा था। इस दौरान ऑटो में राजू जायसवाल समेत दो अन्य कार्यकर्ता भी बैठे थे।
राम कपूर ने बताया कि सतीश महाना से उनकी बचपन से पहचान है। वर्ष 1991 में उन्होंने सतीश महाना के साथ राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया था, इसके बाद महाना से घनिष्ठ मित्रता हो गई। इसके बाद वह 10 साल तक महाना के साथ राजनीति करते रहें। उन्होंने वार्ड अध्यक्ष, कार्यकारणी सदस्य, सेक्टर अध्यक्ष जैसे पदों पर भाजपा के लिए काम किया।
राम कपूर ने बताया कि उन्होंने 1991 में राजनीति में कदम रखा, लंबे समय हिंदुत्व के लिए भाजपा में काम किया। भाजपा में सक्रिय होने के चलते महाना का उनके घर आना जाना लगा रहता था। इसी बीच पैरालायसिस होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगी। उपचार करवाने के लिए उन्हे अपना निजी घर वर्ष 2001 में बेचना पड़ा और आनंद नगर में किराए पर कमरा लेकर पत्नी के साथ रहने लगे। जिसका वर्तमान समय में 4500 रुपए किराया है। उन्होंने बताया कि जबसे वह किराए के मकान में रहने लगे तबसे महाना उनके घर नहीं आए।
राम कपूर ने बताया कि घर बेचने के बाद उन्होंने रामादेवी स्थित त्रिमूर्ति के पास चाट बताशे का काउंटर लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने 20 वर्ष काम किया, लेकिन बीमारी के चलते खड़ा होना मुश्किल हो गया था और उन्हें दुकान बंद करनी पड़ गई।
इसके बाद उन्होंने पत्नी नीता के कहने पर वर्ष 2021 में एक ई-रिक्शा निकलवाया और चलाना शुरू कर दिया। ई-रिक्शा चलाने में आसानी होने के चलते उन्होंने 5 साल चलाया। राम के अनुसार, उनका जन्मदिन रामनवमी के दिन होता है, उस दिन को शुभ मानकर उन्होंने नया ई-ऑटो खरीदा।
उन्होंने मन में ठान लिया था कि जिस दिन महाना से मुलाकात होगी, वह उसी दिन उनको अपने ऑटो में बैठाकर घुमाएंगे। 

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