
संवाददाता
कानपुर। महिलाओं में बढ़ती पेशाब संबंधी समस्याओं यूरोगायनेकोलॉजी और जटिल ऑपरेशनों को लेकर अब नई तकनीकें वरदान साबित हो रही हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में शुक्रवार को आयोजित एक खास लाइव सर्जिकल वर्कशॉप में देश के नामचीन सर्जन्स ने आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया।
इस दौरान डॉक्टरों को बताया गया कि कैसे बिना बड़े चीरे और जटिलताओं के पेचीदा ऑपरेशन सफल किए जा सकते हैं।
वर्कशॉप में कटक से आए मशहूर विशेषज्ञ डॉ. हारा पटनायक और अहमदाबाद के डॉ. विनीत मिश्रा ने ऑपरेशन थिएटर से सीधे सर्जरी का प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने बताया कि महिलाओं में उम्र के साथ होने वाली ‘स्ट्रेस यूरिनरी इनकंटीनेंस’ (हंसते या खांसते समय पेशाब का निकल जाना) जैसी समस्याओं के लिए अब टीवीटी और टीओटी जैसी एडवांस तकनीकें उपलब्ध हैं। इन प्रक्रियाओं में मरीज को रिकवरी बहुत जल्दी होती है और अस्पताल में ज्यादा दिन रुकने की जरूरत नहीं पड़ती।
सर्जरी के दौरान सूटरलेस एनडीवीएच यानी बिना टांके और बिना चीरे के गर्भाशय निकालने की विधि आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही ‘रेलरोड वेजिनोप्लास्टी’ और ‘सेक्रो-हिस्टेरोपेक्सी’ जैसी जटिल प्रक्रियाओं को भी लाइव दिखाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि इन नई तकनीकों के आने से सर्जरी के दौरान होने वाले रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा काफी कम हो गया है।
इस कार्यशाला में केवल कानपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लगभग 150 सीनियर डॉक्टरों और रेजिडेंट्स ने हिस्सा लिया। विशेषज्ञों ने लेक्चर के माध्यम से यह भी समझाया कि कैसे पुरानी पद्धतियों की जगह अब नई मशीनें और धागे ऑपरेशनों को और भी सुरक्षित बना रहे हैं। जूनियर डॉक्टरों के लिए यह एक बड़ा मौका था, जहाँ उन्होंने देश के बड़े विशेषज्ञों से सीधे सवाल-जवाब कर अपनी जिज्ञासाएं शांत कीं।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला और डॉ. रिचा गिरी ने इस आयोजन को चिकित्सा जगत के लिए मील का पत्थर बताया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. किरण पाण्डेय, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. दिव्या त्रिपाठी और डॉ. पविका लाल का विशेष सहयोग रहा। वहीं, नेशनल लेवल की संस्था आईएमएस की ओर से डॉ. सुधा शर्मा और डॉ. अंजुला सहाय ने भी इन तकनीकों को मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।






