April 11, 2026

संवाददाता 

कानपुर। चैत्र नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री के पूजन के साथ ही व्रत रखने वाले भक्तों ने विधि-विधान से पारण किया। 

नवमी के अवसर पर शहर के विभिन्न देवी मंदिरों में भक्ति और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला।  पूरे शहर में नवमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ, जहां हर ओर मां दुर्गा के जयकारों की गूंज सुनाई दी।   सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और माता के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

नवमी के दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों को सभी सिद्धियां और मनोकामनाएं पूर्ण करने का आशीर्वाद देती हैं। इसी आस्था के साथ भक्तों ने सुबह स्नान-ध्यान के बाद मां का पूजन कर नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित किया।शहर के प्रमुख मंदिरों—काली माता मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर, रानी सती मंदिर, बुद्धा देवी मंदिर, जंगली देवी मंदिर और आशा देवी मंदिर—में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। मंदिरों में गुड़, हलवा, पूड़ी और नारियल का भोग अर्पित किया गया,

व्रत रखने वाले भक्तों ने कन्या पूजन कर नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उन्हें भोजन कराया और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद विधिवत पारण कर व्रत समाप्त किया। कई स्थानों पर भंडारे और प्रसाद वितरण का भी आयोजन किया गया, जहां हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

शहर के प्रमुख देवी मंदिरों को मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिससे भक्तों का उत्साह और भी बढ़ गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी विशेष इंतजाम किए गए थे।

नवमी के अवसर पर जगह-जगह प्रसाद के लंगर लगाए गए, जहां भक्तों को हलवा, पूड़ी, चने और खीर का प्रसाद वितरित किया गया। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर इन आयोजनों में भाग लिया और सेवा भाव से श्रद्धालुओं की सेवा की।

माना जाता है  कि नवरात्रि के नौ दिन मां की भक्ति और उपवास करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नवमी के साथ ही नवरात्रि का समापन हो गया, लेकिन भक्तों की आस्था और श्रद्धा का सिलसिला निरंतर जारी है।

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