March 4, 2026

संवाददाता 

कानपुर। कानपुर पुलिस कमिश्नर की वसूलीबाज पत्रकारों और भूमाफिया वकीलों के खिलाफ महीनों पूर्व शुरू की गई कार्यवाही के कारण नगर के सुधरते माहौल की ओर अगला कदम बढ़ाते हुए पुलिस विभाग का शिकंजा उन रसूखदार लोगों को जकड़ने लगा है।जिनके प्रति कोई भी कानूनी या दंडात्मक कार्यवाही होना एक स्वप्न के समान था। परन्तु अपनी ईमानदारी और दृढ़ इच्छा शक्ति के चलते कमिश्नर अखिल कुमार  उन असमाजिक तत्वों को धराशाई करते नजर आ रहे हैं जो कानून और नियम कायदों को दरकिनार करते हुए अपनी जेबें भरने के साथ ही आम लोगों के अधिकारों का हनन करते थे। महीनों पूर्व शुरू की गई मुहिम की शुरुआत वसूलीबाज पत्रकारों से की गई जो भू माफिया वकीलों से होते हुए पुलिस और केडीए जैसे प्रतिष्ठित विभागों के अधिकारी व कर्मचारियों तक पहुंच गई है। शनिवार को पुलिस कमिश्नर की ओर से गठित एसआईटी की जांच के दायरे में इन्हीं विभागों के अधिकारी आ गए जिन्हें नोटिस जारी कर जवाब देने बुलाया गया है। बीती 6अगस्त को बीजेपी नेता से रंगदारी मामले में 

जेल भेजे गए अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जांच कर रही एसआईटी ने अब चार पुलिस अफसरों समेत दो केडीए के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है।यह सभी कानपुर में तैनात रहे और अखिलेश दुबे से इनका आर्थिक लेनदेन और उनके अपराध में संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। इन सभी के बयान दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

कानपुर पुलिस कमिश्नरेट के मीडिया प्रभारी एडीसीपी राजेश पांडेय ने बताया- एसआईटी ने पूछताछ के लिए शुक्रवार को  सरकारी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है।

इसमें कानपुर में तैनात रहे सीओ संतोष सिंह (वर्तमान में हरदोई में तैनात), उन्नाव से हाल ही में मैनपुरी ट्रांसफर हुए एसीपी ऋषिकांत शुक्ला, लखनऊ में तैनात एसीपी विकास पांडेय, कानपुर में तैनात इंस्पेक्टर आशीष द्विवेदी, केडीए में तैनात रहा  वीसी  का  पीआरओ महेंद्र कुमार सोलंकी (एमके सोलंकी) ये मौजूदा समय में बस्ती में तैनात हैं। सूत्रों की मानें तो ये सभी सरकारी कर्मचारी होने के बाद भी अखिलेश दुबे के साथ मिलकर जमीनों के कारोबार कर रहे थे। इतना ही नहीं बकायदा कंपनी बनाकर अपने परिवारीजनों के सदस्यों के नाम पर कारोबार कर रहे थे। एक कंपनी सामने आई है, जिसमें सौ करोड़ से भी ज्यादा का टर्नओवर है। इसी आधार पर इन सभी को नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया गया है।