February 16, 2026

आ स.  संवाददाता

कानपुर। प्रदेश की ओर से जूनियर स्‍तर पर भारतीय क्रिकेट टीम को विश्व विजेता बनाने वाला सितारा अब इस साल आईपीएल में बतौर अम्‍पायर अपनी चमक बिखेरने को पूरी तरह से तैयार हो चुका है। साल 2008 के जूनियर विश्‍वकप में भारतीय टीम के सदस्‍य रहे खिलाड़ी तन्मय श्रीवास्तव अब आईपीएल के मैचों में अम्‍पायरिंग करते देखे जाएंगे। 35 वर्ष की उम्र में अपने नए सफर की शुरुआत करने वाले तन्‍मय प्रदेश की ओर  से तीसरे अम्‍पायर होंगे।  इससे पहले सुनील चर्तुवेदी और सतीश गुप्‍ता इस मुकाम  तकपहुंच सके हैं। बतातें चलें  कि तन्‍मय ने प्रदेश की ओर से लगभग  14  वर्षों तक लगातार क्रिकेट खेला है।इस बार के आईपीएल में वह 22 गज की पट्टी के एक छोर पर एक नई भूमिका में खड़े होंगे।  इससे पहले वह घरेलू मैचों में अंपायर के रूप में अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश करते आ रहें हैं।उत्तर प्रदेश के क्रिकेटरों की नई पीढ़ी से ताल्लुक रखने वाले प्रदेश कें तन्मय आईपीएल के आगामी सत्र में आठ मैचों में चौथे अंपायर की भूमिका निभाएंगे। तन्मय घरेलू क्रिकेट में बड़ी भूमिका निभाने को लेकर उत्साहित हैं।उनके मुताबिक अंपायरिंग खेल देखने के लिए सबसे अच्छी जगह है और इतने लंबे समय तक खेल खेलने के बाद, एक बार फिर से खेल में शामिल होना बहुत अच्छा है। उत्तर प्रदेश से कानपुर के सुनील चतुर्वेदी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के मैच अधिकारियों में शामिल होने वाले पहले व्यक्ति हैं। इसके बाद कानपुर के ही सतीश गुप्ता ने भारत में अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग की, जबकि हाल ही में प्रयागराज के रोहित प्रकाश और मेरठ के परविंदर सिंह मैच रेफरी नियुक्‍त किए गए थे।

कोविड-19 के बाद तन्मय श्रीवास्तव, अश्विनी मंधानी और मोहम्मद आरिफ सहित अंपायरों की एक नई ब्रिगेड इस दल में शामिल हो गई और उनमें एक समानता यह है कि वे शिक्षित होने के साथ-साथ भाषा विशेषकर अंग्रेजी से भी अच्छी तरह वाकिफ है।उन्होंने कहा वास्तव में बीसीसीआई में विभिन्न तकनीकी अधिकारियों के रूप में पूर्व क्रिकेटरों के उदय ने उत्तर प्रदेश के क्रिकेटरों के बारे में धारणा बदल दी है क्योंकि अब लोग यह अच्छी तरह से समझते हैं कि राज्य में क्रिकेटरों की नई पीढ़ी खेल में तकनीकी काम करने के लिए पर्याप्त शिक्षित है।

जब उन्‍होंने अंपायरिंग शुरू की तो यह बिल्कुल अलग अनुभव था।यूपी प्रीमियर टी-20 लीग में अंपायरिंग करते हुए उन्‍होंने देश के शीर्ष अंपायरों में से एक अनिल चौधरी से बहुत कुछ सीखा। उन्होंने कहा कि एक अंपायर के तौर पर हर खेल सभी के लिए नई चुनौतियां लेकर आता है और वह हमेशा चीजों से सीखने की कोशिश करते हैं। उनका अगला लक्ष्‍य  एक अंतरराष्ट्रीय अम्‍पायर बनकर बडे खिलाडियों के साथ मंच साझा करने का है।2023-24 सीज़न में अंपायरिंग के अपने पहले वर्ष में, तन्मय श्रीवास्तव ने ज्यादातर घरेलू क्रिकेट में महिलाओं के मैच किए और इस सीज़न में भी महिलाओं के टी 20 नॉकआउट गेम में ऐसा करना जारी रखा और दो रणजी ट्रॉफी मैचों के अलावा, केरल बनाम एमपीसीए के बीच त्रिवेंद्रम में विजय हजारे ट्रॉफी मैच के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया है।प्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने से पहले ही उन्होंने इंग्लैंड और वेल्स सीरीज में पदार्पण किया। यूपी के साथ उनका पहला सीजन बहुत अच्छा नहीं रहा था लेकिन उन्होंने भारत अंडर-19 के लिए अच्छा प्रदर्शन जारी रखा था। तन्‍मय ने दिल्ली के खिलाफ अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक बनाया था। उसी साल मलेशिया में अंडर-19 विश्व कप में, उन्होंने अपना पहला शतक बनाया था। वह टूर्नामेंट में 262 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे, जिसमें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में भारत की जीत में अहम 43 रन शामिल हैं। उन्हें आईपीएल के लिए किंग्स इलेवन पंजाब ने अनुबंधित किया था और इसके बाद उन्होंने एक मजबूत प्रथम श्रेणी सत्र खेला, जो 2008-09 में यूपी के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में समाप्त हुआ। तन्‍मय ने 90 प्रथम श्रेणी मैचों में 4,918 रन बनाने के बाद 2022 में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया, जिनमें से अधिकांश उन्होंने उत्तर प्रदेश के लिए खेले, एक ऐसा राज्य जिसकी उन्होंने आयु वर्ग की टीमों के लिए विभिन्न समय पर कप्तानी भी की है।

उन्‍होंने बताया कि खेल से जुड़े रहने के चलते प्रशिक्षक बनने के बजाय अंपायर बनने का रास्‍ता चुना। शुरुआत में यह आसान नहीं था, लेकिन कुछ मैच में अम्पायरिंग करने के बाद, खेल के इस महत्‍वपूर्ण काम में उन्हें मज़ा आने लगा।

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