May 13, 2026

संवाददाता 
कानपुर। 
चिकित्सा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कानपुर का जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब प्रदेश का ऐसा पहला केंद्र बनने जा रहा है, जहां मरीजों का इलाज और ऑपरेशन आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की निगरानी में होगा। कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को पूरी तरह हाईटेक बनाने के लिए 70 करोड़ रुपये का एक भारी-भरकम प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद मरीजों को लंबी लाइनों और रिपोर्ट के इंतजार से मुक्ति मिलेगी। बस एक क्लिक करते ही इलाज से जुड़ी सारी सुविधाएं और जानकारी मरीज के हाथ में होगी।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यहाँ होने वाली ‘रोबोटिक सर्जरी’ होगी।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के मुताबिक, अस्पताल में जल्द ही स्वदेशी रोबोट की एंट्री होने वाली है। इसके लिए डॉक्टरों को खास ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे रोबोटिक सर्जरी में एक्सपर्ट बन सकें। रोबोट की मदद से होने वाले ऑपरेशन में चीरा बहुत छोटा होता है, जिससे खून कम बहता है और मरीज की रिकवरी भी बहुत तेजी से होती है।
आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में जांच रिपोर्ट के लिए घंटों या दिनों का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन एआई  के आने से यह सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा। रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक रिपोर्ट अब सीधे एआई के जरिए तैयार और ट्रैक की जा सकेंगी। इससे डॉक्टर को बीमारी समझने में और मरीज को समय पर इलाज मिलने में काफी आसानी होगी। यह सिस्टम रिपोर्ट में होने वाली मानवीय चूक की संभावना को भी खत्म कर देगा।
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के नोडल अफसर डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि फिलहाल इस तकनीक को किडनी ट्रांसप्लांट, न्यूरो सर्जरी, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी और गैस्ट्रो सर्जरी जैसे गंभीर विभागों में लागू करने की तैयारी है। इसके लिए अलग-अलग तकनीकों का डेमो भी लिया जा रहा है ताकि अस्पताल को आधुनिक मशीनों से लैस किया जा सके।
एआई तकनीक लागू होने से अस्पताल की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार आएगा। मरीजों का सारा डेटा डिजिटल होगा, जिससे पुरानी पर्चियां संभालने का झंझट खत्म हो जाएगा। रजिस्ट्रेशन से लेकर डिस्चार्ज तक की प्रक्रिया तेज होगी और गंभीर मरीजों की सेहत पर एआई  आधारित सिस्टम 24 घंटे पैनी नजर रख सकेगा।
कानपुर का मेडिकल कॉलेज अब सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि तकनीक और आधुनिकता का एक ऐसा मॉडल बनने जा रहा है, जिसकी मिसाल पूरे प्रदेश में दी जाएगी। 70 करोड़ का यह निवेश शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले लाखों मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।