February 15, 2026

संवाददाता
कानपुर।
जूना अखाड़ा के संरक्षक व अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता नारायण गिरी महाराज परमट स्थित श्री आनंदेश्वर मंदिर कानपुर पहुंचे। नारायण गिरी महाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धर्मगुरु भाई भी हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि योगी आदित्यनाथ पीएम की रेस में हैं। उनके साथ इंटरनेशनल षड़यंत्र भी हो सकता है।
इसके साथ ही बटुकों से अभद्रता पर वह बोले कि बटुकों ने भी पुलिस कर्मियों से मारपीट और उनके बिल्ले नोचे, गलती दोनों तरफ से हुई है। 

इसके साथ ही उन्होंने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे को लेकर कहा कि इसके पीछे उनका निजी स्वार्थ भी हो सकता है। यूजीसी की नई नियमावली पर उन्होंने कहा कि देश में दंगा कराने की यह एक बड़ी साजिश है।

नरायण गिरी ने कहा कि योगी जी प्रधानमंत्री की रेस में हैं। देश के लोग उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में चाहते हैं। इसके पीछे इंटरनेशनल षड्यंत्र भी हो सकता हैं। साधू संतों को लड़ना, उनकी छवि को खराब करना बहुत से कारण हैं। शंकाराचार्य जी अपने संत रूप में हैं वो पूजनीय हैं। शंकराचार्य हैं या नहीं हम इस विवाद में नहीं जाते हैं। वो पूजनीय हैं उनका भी सम्मान होना चाहिए। यहां कुछ समाजवादी मानसिकता के अधिकारी हैं जो इस तरह का माहौल बना रहे हैं। योगी जी ने इस विवाद पर अपनी तरफ से कुछ भी कहा नहीं है। अगर हरियाणा में जाकर उन्होंने किसी सभा में कोई उदाहरण दिया तो वह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी पर लागू नहीं होता है। यह एक बड़ा षड़यंत्र हैं।
उन्होंने बताया कि ये जो छोटे-छोटे बच्चों के साथ हुआ यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आपने देखा होगा कि कुछ वीडिया ऐसा भी आया कि जिसमें बटुकों ने पुलिस से हाथापाई की है। उनका सामान छीन लिया। बटुकों का भी बर्ताव ठीक नहीं था। दोनों तरफ से इस तरह की घटना हुई है। छोटे-छोटे बच्चे जिस तरह के बयान दे रहे हैं, शंकराचार्य जी को समझाना चाहिए, उनके शिष्य हैं। नाबालिग बच्चों को समझ नहीं है। समझाना चाहिए कि पूरे विश्व में भारत का संदेश गलत जाता है। इस तरह की बयानबाजी नहीं करनी चाहिए। अपने राष्ट्र की बदनामी हो रही है। शंकराचार्य को भी चाहिए कि वह अपने शिष्यों को अनुशासन में रखें।
प्रशासन का काम कानून व्यवस्था को बनाए रखना है। शांति व्यवस्था बनाना, कौन शंकराचार्य है, कौन नहीं है…? यह बात तो काशी और अखाड़ा परिषद तय करता है। अफसरों को कोई अधिकार नहीं है कि वह किसी साधु से प्रमाण पत्र मांगे। कोई साधु है कि नहीं है। पूरी तरह सरासर गलत और नासमझी है।
पीसीएस अफसर अलंकार के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि
वो तो कहीं न कहीं उसके मन में कोई और भावना हो और कोई व्यक्तिगत स्वार्थ हो। जैसे इस तरह के मौके पर लोग नाजायज फायदा उठा लेते हैं। इस समय पूरे देश में इसी तरह का माहौल बना हुआ है। चलो हम भी लाभ उठा लें, इस प्रकार से उनका कोई व्यक्तिगत स्वार्थ भी हो सकता है।
यूजीसी के नए नियम तो देश में जातीय दंगा कराने की बड़ी साजिश है। इस नियम को तत्काल प्रभाव से वापस होना चाहिए। ये यूजीसी की नई नियमावली देशहित में नहीं है। संसोधन नहीं होना चाहिए, इसे तत्काल वापस लेना चाहिए। 

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