
संवाददाता
कानपुर। शहर के बाबूपुरवा स्थित बेगमपुरवा क्षेत्र में गुरुवार को एक अनोखा और चर्चित रेस्क्यू देखने को मिला। कुत्तों से भयभीत होकर एक बिल्ली का बच्चा करीब 25 फीट ऊंचे पिलर पर जा चढ़ा, जहां से नीचे उतरना उसके बस में न रहा। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची अग्निशमन विभाग की टीम ने घंटेभर की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला। घटनास्थल पर मौजूद भीड़ ने जमकर तालियां बजाईं।
गौरतलब है कि इस दौरान कई नागरिकों ने यह टिप्पणी भी जोड़ी कि जिस फायर ब्रिगेड ने आज एक बिल्ली के बच्चे को बचाने में पूरी कुशलता और सजगता का परिचय दिया, वहीं पिछले कई अग्निकांडों में उसी विभाग का समय पर न पहुंच पाना और आधुनिक उपकरणों की कमी अक्सर सवालों के घेरे में रही है।
बेगमपुरवा निवासी समाजसेवी साबिर हुसैन ने बताया कि कुत्तों से बचने के लिए बिल्ली का बच्चा दो मकानों के बीच खड़े पिलर पर चढ़ गया, लेकिन ऊंचाई देखकर कांपने लगा। लोगों ने निजी तौर पर उसे उतारने की कोशिश की, फिर एनिमल हेल्पलाइन और फायर ब्रिगेड को फोन किया। किदवई नगर फायर स्टेशन की टीम सीढ़ी और रस्सी के सहारे जुट गई और मौके पर उपस्थित लोगों की तालियों के बीच करीब एक घंटे बाद बिल्ली के बच्चे को नीचे उतारा।
चर्चा इस बात की भी है कि शहर में जब कभी किसी बड़ी आग की सूचना मिलती है, तो फायर ब्रिगेड को पहुंचने में देरी लगती है। वहीं, अगर कोई मासूम जानवर मुसीबत में हो तो विभाग पूरी गंभीरता और गति के साथ मौके पर मौजूद होता है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि फायर विभाग की सजगता सिर्फ कैमरे और तालियों की गूंज के लिए बचाकर रखी गई हो, जबकि अग्निकांडों में उनके संसाधनों की हालत ‘धुएं में’ ही बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अगर बिल्ली रेस्क्यू की तरह ही आग पर नियंत्रण पाने में भी सजगता दिखाई जाए, तो नगर कई अनहोनी घटनाओं से बच सकता है। फिलहाल बिल्ली का बच्चा सकुशल है और लोग ताली बजा चुके हैं — बाकी रह गई, शहर की सुरक्षा की सच्ची अग्निपरीक्षा।





