• रणजी अलग, मुश्ताक-विजय हजारे अलग तो क्या कल अलग-अलग टीमें भी?
प्रदेश के पूर्व खिलाड़ियों की दावेदारी पर ‘बाहरी’ दावेदार भारी पड़ने की चर्चा

संवाददाता
कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) में घरेलू क्रिकेट के कोचिंग सिस्टम को लेकर एक ऐसा बदलाव आकार ले रहा है, जो आने वाले समय में संघ की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर सकता है। चर्चा है कि अब लाल गेंद और सफेद गेंद क्रिकेट के लिए अलग-अलग कोचिंग व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। यानी रणजी ट्रॉफी के लिए अलग कोचिंग यूनिट और विजय हजारे तथा सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के लिए अलग प्रशिक्षकों की व्यवस्था पर विचार चल रहा है। भारत में ऐसा कोई राज्य नहीं है, जहां लाल गेंद और सफेद गेंद की क्रिकेट टीमों के लिए अलग-अलग मुख्य कोच नियुक्त किए गए हों लेकिन यूपीसीए की वेबसाइट पर 2026-27 सत्र के लिए कोच और सपोर्ट स्टाफ की नियुक्ति का विज्ञापन भी जारी किया गया है।
यूपीसीए से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के पूर्व खिलाड़ियों ने भी इन पदों के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश की क्रिकेट प्रतिभाओं को तराशने वाले अनुभवी स्थानीय पूर्व खिलाड़ियों को आखिर कितना अवसर मिलेगा? संघ के भीतर इस बात की चर्चा भी है कि अलग-अलग टीमों के लिए अलग-अलग कोचिंग यूनिट बनने से स्थानीय पूर्व क्रिकेटरों की दावेदारी अपेक्षाकृत कमजोर पड़ सकती है।
यूपीसीए की यह कवायद यहीं नहीं रुकती दिख रही। यदि रणजी के लिए अलग और सफेद गेंद की दोनों प्रमुख प्रतियोगिताओं के लिए अलग कोच नियुक्त होते हैं तो आगे चलकर रणजी, विजय हजारे और मुश्ताक अली के लिए स्वतंत्र टीम-संरचना और अलग-अलग सपोर्ट स्टाफ की मांग का रास्ता भी खुल सकता है। सवाल यही है कि क्या एक ही राज्य की जुनियर और सीनियर क्रिकेट टीम को प्रतियोगिता के प्रारूप के आधार पर अलग-अलग ढांचों में बांटना वास्तव में खिलाड़ियों के हित में होगा या फिर इससे व्यवस्था और खर्च दोनों का विस्तार होगा?
हालांकि अलग कोचिंग व्यवस्था के पक्ष में तर्क यह है कि लाल गेंद और सफेद गेंद क्रिकेट की तकनीकी तथा रणनीतिक जरूरतें अलग होती हैं। हाल में यूपीसीए द्वारा विभिन्न स्तरों के लिए अलग मुख्य कोच और सपोर्ट स्टाफ की तैयारी की खबरें भी सामने आई हैं और 30 सितंबर की एजीएम में इस दिशा में निर्णय की संभावना बताई गई है।
यूपीसीए सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता के अनुसार एजीएम में इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। एजीएम 30 सितंबर को कानपुर में प्रस्तावित है।






