January 22, 2026

संवाददाता
कानपुर। 
स्मार्ट सिटी बने भले ही बरसों बीत गए हों, लेकिन गोविंद नगर की डीबीएस कच्ची बस्ती आज भी बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है।  

यहाँ लोगों के घरों के सामने रास्ते सीवर के पानी भरे है।
घर से बाहर निकलने की जगह तक नहीं है। करीब 27 हजार की आबादी बदबू में गुजारा कर रही है। गलियों में भरा सीवर और नाले का पानी, टूटी नालियां और बदबू, यही यहां के लोगों की रोजमर्रा की हकीकत है। एक स्थानीय निवासी ने अपना दुख बताया कि 10 दिन बाद बेटी की शादी है, लेकिन इस गंदगी और जलभराव में कोई रिश्तेदार घर आने को तैयार नहीं। तीन महीने से समस्या जस की तस है। 
करीब एक से डेढ़ किलोमीटर लंबे नाले में जगह-जगह से पटिया गायब है। नतीजा यह कि नाले और सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। लोग मजबूरी में उसी पानी से होकर गुजरते हैं। कई घरों में तो गंदा पानी भी घुस चुका है।
बच्चों का फिसलकर गिरना और घायल होना आम बात हो गई है। महिलाओं के हालात सबसे बदतर हैं, न नहाने की सुविधा, न शौच के लिए सुरक्षित जगह। मच्छरों और बदबू ने बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि तीन महीने से समस्या जस की तस है। लोग नगर निगम के दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं। 
भाजपा कार्यकर्ता जितेंद्र पांडे का कहना है कि वार्ड 93 के पास पुलिया के नजदीक नाला चोक होने से पूरा इलाका जलमग्न है। नगर निगम से लेकर पार्षद और विधायक तक सभी को जानकारी दी गई थी। निरीक्षण भी हुआ था, लेकिन हालात जस के तस हैं।
जितेंद्र पांडे ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो लोग सिर मुंडवाकर नगर निगम में धरना देंगे। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का एक डिब्बा इस वार्ड में पटरी से उतर गया है।
महिलाएं नीरू और सोमलता ने बताया कि 25–26 साल से यहां रह रही हूं। इतनी बदहाली पहले कभी नहीं देखी। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, स्कूल जाना मुश्किल हो गया है। शिकायतों का कोई असर नहीं हो रहा है। महिलाओं का साफ कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगी। 

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