March 16, 2026

संवाददाता 

कानपुर। ग्रीनपार्क स्थित खेल विभाग की नगर इकाई में इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। शासन द्वारा नियुक्त स्थायी खेल अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद विभागीय कामकाज में संविदा कर्मचारी स्टैनली ब्राउन की जबरन भूमिका ज्यादा प्रभावशाली नजर आ रही है। हालात ऐसे हैं कि कई महत्वपूर्ण निर्णयों और व्यवस्थाओं में स्थायी अधिकारियों की तुलना में संविदा कर्मचारी का हस्तक्षेप अधिक बताया जा रहा है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार खेल विभाग में शासन द्वारा नियुक्त स्थायी खेल अधिकारियों की जिम्मेदारी खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना, खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और खेल परिसरों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है। लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो वास्तविक स्थिति इससे अलग दिखाई दे रही है। कई मामलों में स्थायी अधिकारी एक रसूखदार संविदा कर्मचारी के आगे

 निर्णय लेने से बचते नजर आते हैं ऐसा इसलिए भी क्योंकि संविदा कर्मचारी  स्टैनली ब्राउन विभाग के कामकाज में जबरन अपना दखल देने से बाज़ नहीं आ रहा है।

बताया जा रहा है कि खेल परिसरों की व्यवस्थाओं से लेकर कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने तक में संविदा कर्मचारी की सक्रियता अधिक देखी जा रही है। विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि कई बार खिलाड़ी और प्रशिक्षक भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए  जब उच्च अधिकारियों के पास जाते हैं तो वहीं कर्मचारी जबरन हस्तक्षेप कर अपने नंबर बढ़ाने का काम करता है।

 इस स्थिति ने विभाग के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चा को जन्म दे दिया है। खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों का कहना है कि जब शासन ने स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति की है तो उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन करें। यदि निर्णय लेने और व्यवस्थाएं संभालने का काम संविदा कर्मचारियों के हाथ में रहेगा तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि सभी जिम्मेदारियां नियमों के अनुसार तय हों और उनका पालन भी उसी तरह हो। संविदा कर्मचारियों की भूमिका निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय और नेतृत्व स्थायी अधिकारियों के हाथ में होना चाहिए।उधर विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले को लेकर उच्चाधिकारियों तक भी चर्चा पहुंच चुकी है। विभाग इस स्थिति को गंभीरता से लेकर कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर खेल व्यवस्था इसी तरह संविदा कर्मचारियों के भरोसे चलती रहेगी। 

खेल विभाग में कार्यरत संविदा कर्मचारी की कार्यशैली से परेशान स्थाई कर्मचारी बहुत ही दबाव में कार्य कर रहे हैं। इस मामले पर बात करने पर ग्रीनपार्क में तैनात एक स्थाई कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्टैनली ब्राउन जिला प्रशासन और शासन के अधिकारियों से अपनी निकटता का प्रभाव दिखाते हुए सभी को डरा कर रखने का काम कर रहे हैं जो पूरी तरह से अनुचित है। विभाग को चाहिए कि संविदा कर्मचारी की कार्य शैली पर रोक लगाए जिस खेल विभाग का पुराना स्वरूप वापस लौट सके और उच्च अधिकारी का सम्मान बरकरार रहे।

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