February 23, 2026

4 देशों के राष्ट्रपति से मिला, 9 राज्यों तक फैला सिंडिकेट  का नेटवर्क।

कानपुर। नगर में बिना परीक्षा दिए मार्कशीट और डिग्रियां दिलाने वाला सिंडिकेट पकड़ा गया। मास्टर माइंड मैथ टीचर शैलेंद्र से पुलिस ने बंद कमरे में पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, वो बेहद चौंकाने वाले थे। बीटेक, बी. फार्मा, एलएलबी की डिग्रियां दिलाने वाला सिंडिकेट सिर्फ 40% कमीशन पर काम करता था। फर्जी डिग्रियों से कमाई का 60% विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारियों के पास जाता था।

इस सिंडिकेट के सरगना शैलेंद्र ने एडमिशन एजेंट की तरह काम शुरू किया था, मगर धीरे-धीरे कई विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारी उसके संपर्क में आ गए।

इसके बाद वह फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने लगा। इस तरह ये सिंडिकेट 9 राज्यों की 14 यूनिवर्सिटी तक पहुंच गया। पुलिस को छापेमारी में इन यूनिवर्सिटी की 900 से ज्यादा फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां मिली थीं। अब पुलिस इन यूनिवर्सिटी के क्लर्क और कर्मचारियों को ट्रेस कर रही है।

राजदूत बनकर कई देशों के राष्ट्रपति से मिला मनीष

डी सी पी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया- सिंडिकेट का फरार मेंबर मनीष उर्फ रवि बहुत ही शातिर है, वह खुद को भारत राजदूत बताकर 4 देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक से मिल चुका है।

कोचिंग पढ़ाते हुए यूनिवर्सिटी कर्मचारियों के संपर्क में आया

इस जांच में शामिल किदवई नगर इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार राम ने बताया- शैलेंद्र 2010 में काकादेव में मैथ की कोचिंग पढ़ाने आया था। इस दौरान शैलेंद्र कई प्राइवेट यूनिवर्सिटी के संपर्क में आ गया। उनके लिए वह बतौर एजेंट काम करने लगा।

वह बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा समेत अलग-अलग कोर्स सस्ते दामों में दाखिला कराने लगा और उसके एवज में मोटा कमीशन वसूलने लगा था। इस दौरान वह छतरपुर में रहने वाले आरोपी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद के मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद के विनीत, भोपाल के शेखू उर्फ ताबिश, नागेंद्र, जोगेंद्र और अश्वनी के संपर्क में आया।

सिंडिकेट से जुड़े हर एजेंट का था अलग-अलग डिपार्टमेंट

इसके बाद शैलेंद्र ने इन सब के साथ मिलकर 2012 से अपना सिंडिकेट शुरू किया, फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इंस्पेक्टर ने बताया, सिंडिकेट से जुड़े सभी मेंबरों के बाकायदा डिपार्टमेंट तय किए गए थे। हर कोर्स और विश्वविद्यालय के लिए अलग-अलग मेंबर थे, जिनको फर्जी डिग्री, मार्कशीट मुहैया कराने की जिम्मेदारी थी। डी सी पी साउथ के मुताबिक सिंडिकेट के मेंबरों ने सबसे ज्यादा एलएलबी, बीफार्मा और डीफार्मा की डिग्रियां मिली हैं। इसके साथ ही सीएसजेएमयू की 100 माइग्रेशन सर्टिफिकेट की बुकलेट मिली, जिसमें से 80 सर्टिफिकेट लोगों को बांटे जा चुके हैं।

सिंडिकेट के शैलेंद्र ने पुलिस को बताया- वह 2 से 3 दिन के अंदर किसी भी तरह की डिग्रियां लोगों को मुहैया करा देते थे, हर डिग्री मार्कशीट में उन्हें तय की गई रकम से 40% मिलता था, जबकि उसका 60% हिस्सा विभिन्न यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों को जाता था।

उन्होंने बताया कि फरीदाबाद स्थित लिंग्या विश्वविद्यालय से 100 मार्कशीट व डिग्रियां मिली थी, जांच में सभी फर्जी पाई गई हैं।उन्होंने बताया- मैं किदवई नगर में रहकर चौकीदारी का काम करता हूं। मेरे भाई प्रभात यादव ने 2024-25 में आजमगढ़ से गणित विषय से इंटर की परीक्षा पास की थी। इसके बाद वह बीते एक साल से काकादेव में NEET की तैयारी कर रहा है।मेडिकल की पढ़ाई करने के दौरान वह दोबारा जीव विज्ञान विषय से इंटर करना चाहता था, जिसपर वह शैलेंद्र के संपर्क में आया। शैलेंद्र ने उससे 4 हजार रुपए लेकर प्राइवेट फार्म भरवा दिया था।

15 फरवरी को प्रवेश पत्र लेने के लिए प्रभात ने शैलेंद्र से संपर्क किया, तो वह टालमटोल करने लगा। इसके बाद पुलिस की छापेमारी हो गई। शुक्रवार को भटकते हुए महेंद्र किदवई नगर थाने पहुंचे, उन्होंने बताया कि 23 फरवरी को छोटे भाई की परीक्षा है, अगर प्रवेश पत्र नहीं मिला तो उसका साल बर्बाद हो गया। तीन फ्लोर की बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर सनशाइन डायग्नोस्टिक सेंटर, फर्स्ट फ्लोर पर गगनदीप हेल्थ केयर सेंटर चलता मिला।सेकेंड फ्लोर स्थित एक फ्लैट में शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन का ऑफिस था, जिसके बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगा था।