
संवाददाता
कानपुर। बुधवार को प्रणवीर सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में विवाद हुआ। यहां जेसीबी की टक्कर से अपने सहपाठी की मौत से भड़के छात्रों ने विरोध किया तो विवाद हुआ।
पीएसआईटी कैंपस में छात्रों ने बुधवार को जमकर हंगामा किया। तोड़फोड़ भी की। गुस्साए छात्रों ने अपनी मांगें रखी व धरने पर बैठ गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को खदेड़ा। पुलिस पर छात्रों को पीटने का भी आरोप है। हंगामे में कई छात्र घायल भी हुए
पीएसआईटी में हंगामे के दौरान छात्रों ने बताया- संस्थान में 90 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। इससे कम होने पर उनसे फाइन लिया जाता है। छात्रों ने हंगामें के दौरान अनिवार्य अटेंडेंस को 75 प्रतिशत करने की मांग की गई, जिसको संस्थान ने मान लिया है।
इसके अलावा संस्थान में हुई घटना में किसी छात्र पर कार्रवाई न होने की बात भी संस्थान ने कही है। छात्र अर्पित सिंह यादव ने 90 प्रतिशत से कम अटेंडेंस होने पर फाइन लिए जाने की बात कही। कहा कि हमारा मेडिकल भी अमान्य कर दिया जाता है।
बात नहीं सुनी गई तो छात्रों ने हंगामा शुरू किया। करीब 3 हजार छात्रों ने कॉलेज में घुसकर तोड़फोड़ की। दरवाजे, खिड़की, टेबल तोड़ दी। मौके पर सचेंडी, पनकी, अरमापुर, कल्याणपुर सहित 7-8 थानों की फोर्स, पीएसी पहुंची।
दोपहर 1 बजे बवाल बढ़ गया। पुलिस और छात्रों में झड़प हो गई। पुलिस ने छात्रों को हटाने के लिए दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां मारी। कई छात्र गिरकर घायल हो गए। बवाल के बाद छात्रों की सारी मांगे मान ली गई हैं।
दरअसल, सोमवार को कैंपस में निर्माण काम में लगी जेसीबी से टकरा कर बीसीए फाइनल ईयर के छात्र की मौत हो गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि छात्र की किडनी, लंग्स, पैनक्रियाज डैमेज हो गया था। इसी के विरोध में छात्र न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे।
छात्रों का आरोप है कि कॉलेज कैंपस में चल रहे निर्माण काम के दौरान सुरक्षा इंतजाम न होने से यह हादसा हुआ। वहीं, कॉलेज प्रबंधन ने घटना को कैंपस के बाहर का मामला बताया। मृतक की पहचान प्रखर सिंह निवासी रतनलाल नगर के रूप में हुई।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कानपुर प्रांत मंत्री दिनेश यादव ने कहा कि अटेंडेंस के नाम पर निजी संस्थानों में छात्रों से धन उगाही की शिकायतें मिल रही हैं। बीते दिनों में केआईटी, महाराणा प्रताप और पीएसआईटी से शिकायतें आई हैं जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
हमारी मांग है कि यूजीसी के नियमों के अनुसार 75 प्रतिशत अनिवार्य अटेंडेंस को ही सभी संस्थानों में मान्य किया जाए। अपनी मनमर्जी से नियम बनाकर छात्रों से हो रही धन उगाही को तत्काल रोका जाए।
यूजीसी व एआईसीटीई के दिशानिर्देशों के अनुसार निजी और सरकारी दोनों संस्थानों में सेमेस्टर परीक्षा में बैठने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य है। यह नियम सभी लेक्चर, प्रैक्टिकल और ट्यूटोरियल पर लागू होता है। 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति होने पर छात्र को परीक्षा से रोका जा सकता है
अटेंडेंस कम होने पर फाइन लेने के मामले में पीएसआईटी के ग्रुप डायरेक्टर डॉ. मनमोहन शुक्ला ने बताया कि अनिवार्य अटेंडेंस को 75 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे पहले भी फाइन नहीं लिया जाता था। सिक्योरिटी डिपाजिट लिया जाता था जो कि अगले सेमेस्टर में वापस हो जाता था। 95 प्रतिशत से अधिक अटेंडेंस वाले छात्रों को संस्थान पैसा देता है।






