
संवाददाता
कानपुर। शिक्षा की शक्ति राष्ट्र के चरित्र का निर्माण करती है, और जब बात छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की हो, तो यह केवल एक उच्च शिक्षण संस्थान ही नहीं अपितु ‘प्रतिभाओं की खान’ बनकर उभरा है। अपने 61 वर्षों के गौरवशाली सफर में इस विश्वविद्यालय ने ऐसे विद्वान दिए हैं, जिन्होंने रायसीना हिल्स से लेकर सात समंदर पार अमेरिका के शैक्षणिक गलियारों तक अपनी धाक जमाई है।
आज जब विश्वविद्यालय अपना 61वां स्थापना दिवस मना रहा है, तो इसकी सबसे बड़ी पूंजी इसके वे पुरातन छात्र हैं, जिन्होंने राजनीति, रक्षा, साहित्य, विज्ञान और कला के क्षेत्र में न केवल अपना नाम रौशन किया, बल्कि कानपुर को वैश्विक मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
सीएसजेएमयू के इतिहास का सबसे सुनहरा पन्ना भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पदों से जुड़ा है। यह देश के गिने-चुने विश्वविद्यालयों में से है जिसके संबद्ध महाविद्यालयों ने राष्ट्र को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जैसा प्रधानमंत्री और रामनाथ कोविंद जैसा राष्ट्रपति दिया। डीएवी कॉलेज के गलियारों से शुरू हुआ इनका सफर भारत के लोकतंत्र की सर्वोच्च ऊंचाई तक पहुंचा। अटल जी की ओजस्वी वाणी और कोविंद जी की सादगी ने इस संस्थान की समावेशी शिक्षा व्यवस्था को पूरी दुनिया के सामने प्रमाणित किया।
जब बात देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा की आती है, तो भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का नाम सबसे पहले आता है। क्राइस्ट चर्च कॉलेज के पुरातन छात्र रहे डोभाल की रणनीतिक सूझबूझ और ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी योजनाओं के पीछे कहीं न कहीं वही बौद्धिक नींव है जो उन्होंने कानपुर में स्नातक के दौरान हासिल की थी। उनके साथ ही प्रशासनिक सेवा में नृपेंद्र मिश्रा और संजय कोठारी जैसे प्रशासनिक अधिकारी ने भी इस विश्वविद्यालय का मान बढ़ाया है।
सीएसजेएमयू ने केवल कठोर शासक या अधिकारी ही नहीं दिए, बल्कि समाज को कोमल संवेदनाएं देने वाले साहित्यकार भी दिए। पद्म भूषण गोपालदास ‘नीरज’ के गीतों की खनक और श्याम नारायण पाण्डेय की कविताओं का ओज आज भी विश्वविद्यालय की मिट्टी में महसूस किया जा सकता है।
मनोरंजन की दुनिया में, बॉलीवुड के सफलतम निर्देशकों में शुमार डेविड धवन और अपनी जादुई आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गायक अभिजीत भट्टाचार्य इसी विश्वविद्यालय की देन हैं। खेलों के मैदान में मोहम्मद कैफ और आर.पी. सिंह की सफलता चीख-चीख कर कहती है कि यहाँ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।
अब सीएसजेएमयू के छात्र केवल नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं। ‘सीएसजेएमयू नवाचार फाउंडेशन’ के माध्यम से विश्वविद्यालय छात्रों को अपने स्टार्टअप शुरू करने के लिए मंच दे रहा है। वर्तमान में ‘सफलहोस्ट’ और ‘हेल्थ कंपास’ जैसे कई स्टार्टअप इस इनक्यूबेशन सेंटर से निकलकर बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।
विश्वविद्यालय की इस विशाल इमारत की मजबूती इसके संबद्ध कॉलेजों डीएवी, वीएसएसडी, क्राइस्ट चर्च और पीपीएन जैसे संस्थानों पर टिकी है। इन कॉलेजों ने एक ‘नर्सरी’ की तरह प्रतिभाओं को सींचा और उन्हें विश्वविद्यालय रूपी विशाल वृक्ष में तब्दील किया।
विश्वविद्यालय का 61वां स्थापना दिवस उन सभी पुरातन छात्रों को समर्पित है जो आज दुनिया के विभिन्न कोनों में रहकर ‘कानपुरिया’ ज्ञान का परचम लहरा रहे हैं। यह उत्सव है उस अटूट परंपरा का, जो 1966 में एक छोटे से भवन से शुरू होकर आज एक वैश्विक ज्ञान केंद्र बन चुकी है।






