
ओसामा रसूल
कानपुर। मूलगंज चौराहे पर मंगलवार की सुबह एक आम दिन अचानक एक हैरतअंगेज और जानलेवा घटना में बदल गया, जहाँ एक पुलिस अधिकारी की त्वरित सोच और हिम्मत ने मौत को चुनौती देकर एक नागरिक के प्राण बचा लिए। यह घटना नागरिकों और प्रशासन के बीच एक मानवीय जुड़ाव की मिसाल बन गई है।
घटना तब घटी जब एक मध्यम आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ ऑटो रिक्शा का इंतजार कर रहा था। अचानक वह छाती पर तेज दर्द की शिकायत करते हुए बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ा। उसकी पत्नी की चीखों से भीड़ इकट्ठा हो गई, लेकिन लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें।
तभी, मौके पर पहुँचे बाकरमण्डी चौकी प्रभारी और थाना मूलगंज के उपनिरीक्षक रोहित तोमर ने स्थिति की गंभीरता को तुरंत भाँप लिया। भीड़ को संभालते हुए और एम्बुलेंस को बुलाने का इंतजाम करते हुए, उन्होंने देखा कि पीड़ित की सांसें रुक रही हैं और उसकी नब्ज कमजोर पड़ गई है। प्रशिक्षण और मानवीय करुणा से प्रेरित होकर, रोहित तोमर ने तुरंत व्यक्ति को सीधा लिटाया और सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया।
लगभग तीन-चार मिनट तक निरंतर चेस्ट कंप्रेशन और रेस्क्यू ब्रीथिंग देने के बाद, चमत्कार हुआ। व्यक्ति ने कराहते हुए आँखें खोलीं और सांस लेना शुरू किया। भीड़ में राहत की एक सामूहिक सांस दौड़ गई। रोहित तोमर ने तब तक उसको पूरा सहारा दिया, जब तक कि एम्बुलेंस आकर उसे उर्सला अस्पताल नहीं ले गई।
अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, पुलिस अधिकारी द्वारा समय रहते दी गई सीपीआर ही उस व्यक्ति के बचने की मुख्य वजह थी। उन्होंने बताया, “हृदयाघात के बाद के पहले कुछ मिनट ‘गोल्डन आवर’ होते हैं। अगर तुरंत सीपीआर न मिले, तो मरीज के बचने की संभावना बहुत कम हो जाती है। उपनिरीक्षक रोहित तोमर का कार्य प्रशंसनीय है।”
एक जिम्मेदार अधिकारी की ज़ुबानी:
उपनिरीक्षक रोहित तोमर ने बताया, “हमारी ट्रेनिंग में फर्स्ट एड एक अहम हिस्सा है। उस वक्त बस इतना सोचा कि एक इंसान की जान बचानी है। मैं बस अपना फर्ज निभा रहा था। परिवार वालों और डॉक्टरों का शुक्रिया जिन्होंने हौसला बढ़ाया।”
निस्संदेह, उपनिरीक्षक रोहित तोमर का यह साहसिक और निष्ठावान कार्य केवल एक खबर नहीं, बल्कि समाज में सेवा और मानवता का एक जीवंत उदाहरण है।






