आज़ाद संवाददाता
कानपुर। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को दुरस्त रखने के लिए हर संभव मदद कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने प्रदेश के 15 डॉक्टरों के खिलाफ जांच कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जिसमें कि एक डॉक्टर कानपुर के केपीएम अस्पताल की है।
उपमुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख सचिव को विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। डॉक्टरों पर रोगियों की चिकित्सा में लापरवाही, अनधिकृत रूप से अनुपस्थिति, अनुशासनहीनता के आरोप शामिल है। कानपुर नगर स्थित केपीएम नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात डॉ. दीप्ती गुप्ता के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
कानपुर नगर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह अरबन पीएचसी केपीएम अस्पताल में निरीक्षण करने 16 फरवरी को पहुंचे थे। शासन की तरफ से चलाए जा रहे मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का जायजा लेने के लिए डीएम जब वहां पर पहुंचे तो रजिस्टर पर मरीजों की जो इंट्री दर्ज की गई थी, वह कमोवेश एक जैसी राइटिंग में लिखी गई थी।
इस पर जब डीएम को शक हुआ। रजिस्टर में दर्ज एक मोबाइल नंबर पर उन्होंने कॉल करके पूछा तो सामने वाले शख्स ने बताया कि वह तो अस्पताल नहीं आया। इसके बाद जब नोडल अधिकारी डॉ. आरएन सिंह ने यहां पर मौजूद डॉ. दीप्ति गुप्ता से पूछताछ की तो उन्होंने रजिस्टर में मरीजों की फर्जी इंट्री की बात को स्वीकारा।
डॉ. दीप्ति गुप्ता ने यहां पर एक-दो नहीं बल्कि 24 मरीजों की फर्जी इंट्री की थी। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर करते हुए नोडल अधिकारी के खिलाफ भी नाराजगी दिखाते हुए इसे सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी मानते हुए एक्शन लिए जाने को कहा था।
डीएम ने उस समय कहा था कि वह प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से डॉ. दीप्ति गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति करने के साथ ही सीएमओ, एडिशनल सीएमओ, नोडल अधिकारी आदि की जिम्मेदारी तय करने की संस्तुति करेंगे। माना जा रहा है कि डीएम की संस्तुति के बाद ही उन पर ये कार्रवाई हुई हैं।







