January 20, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  माघ मास की मौनी अमावस्या पर रविवार को कानपुर के गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भोर से ही लोग गंगा स्नान के लिए घाटों पर पहुंचने लगे और विधि-विधान से पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर दान-पुण्य किया। घाटों पर ‘हर-हर गंगे’ और ‘जय मां गंगा’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
मौनी अमावस्या को पितृ पर्व भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, दान और पुण्य कर्म करने से पितर तृप्त होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसी वजह से श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के साथ पितरों के निमित्त तर्पण और दान भी किया।
धार्मिक ग्रंथों में माघ माह को अत्यंत पवित्र बताया गया है। मान्यता है कि इसी दिन से द्वापर युग का शुभारंभ हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने, सत्य और संयम का पालन करने से आत्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।
मौनी अमावस्या पर दान का भी खास महत्व है। श्रद्धालुओं ने तेल, तिल, कंबल, सूखी लकड़ी, गरम वस्त्र, काले कपड़े और जूते जैसी वस्तुओं का दान किया। घाटों पर जरूरतमंदों को दान देकर लोगों ने पुण्य अर्जित किया।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। गंगा घाटों पर स्थानीय पुलिस बल के साथ गोताखोर पुलिस की भी तैनाती की गई थी। प्रशासन लगातार भीड़ पर नजर बनाए हुए था, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना न हो। 

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