
संवाददाता
कानपुर। मेयर और पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना तक पहुंच गया है। जिलाध्यक्ष ने लखनऊ जाकर सतीश महाना से मुलाकात की है और उन्हे कानपुर नगर निगम में चल रहे इस विवाद के बारे में जानकारी दी है।
यह उम्मीद की जा रही है कि सतीश महाना के हस्तक्षेप के बाद इस मामले का हल निकाला जा सकता है। 24 जनवरी को कानपुर में बैठक होनी है, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और शीर्ष नेतृत्व के लोग मौजूद रहेंगे। जिसके बाद इस मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाएगी।
कानपुर नगर निगम में 26 दिसंबर को सदन हुआ था। इस सदन से ही मेयर और पार्षदों के बीच विवाद शुरू हो गया था। पार्षद नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं और इसका कारण मेयर के बेटे बंटी पांडेय को बता रहे हैं।
मेयर ने पार्षदों को सस्पेंड कर दिया था। पार्षदों ने मेयर और उनके बेटे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से लेकर यह मामला प्रभारी मंत्री और डिप्टी सीएम तक पहुंच गया। वहीं मेयर प्रमिला पांडेय ने सीएम योगी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से इस बारे में मुलाकात की। लेकिन यह मामला शांत नहीं हो रहा है।
मेयर और पार्षदों के विवाद को खत्म करने के लिए प्रभारी मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी दोनों पक्षों से बातचीत की। वह दो बार कानपुर आए और दोनों पक्षों का विवाद सुलझाने की कोशिश की। 7 जनवरी को सर्किट हाउस में 5 घंटे इन हाउस मीटिंग चलती रही।
इसके बाद भी मेयर और पार्षदों का विवाद नहीं सुलझ सका। मेयर जब इस मीटिंग से बाहर निकली थी तो काफी भड़की हुई थी। वहीं पार्षदों का कहना है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे। पार्षदों का कहना है कि वह नगर निगम में होने वाले भ्रष्टाचार को खत्म करके रहेंगे।
पार्षद नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं और इसकी मुख्य वजह मेयर के बेटे बंटी पांडेय को बता रहे हैं। उनका कहना है कि बंटी पांडेय ही नगर निगम के अंदर होने वाले हर भ्रष्टाचार की जड़ है। हर टेंडर और ठेके में उनका कमीशन सेट है।
इसके अलावा सारे बड़े ठेके और टेंडर उनके परिचितों को ही बांटे जाते हैं। यह भी आरोप लगाए गए कि निगम में भर्ती से लेकर साइकिल स्टैंड तक के ठेके के लिए कमीशन लिया जाता है। इसके बाद ही किसी भी ठेकेदार को नगर निगम के ठेके दिए जाते हैं।






