March 4, 2026

संवाददाता
कानपुर।
  शहर में शनिवार को मौसम साफ था। कोहरा न होने के चलते विजिबिलिटी सामान्य रही। हालांकि, बर्फीली हवा से गलन पड़ रही है। लोग ठंड से राहत पाने के लिए अलाव के पास बैठे दिखे। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आज दिन में धूप निकल सकती है, लेकिन उत्तर पश्चिमी बर्फीली हवा के चलते रात और शाम का पारा गिरेगी।
न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री रहा। दिन में सूरज न निकलने से अधिकतम तापमान में 5.4 डिग्री गिरकर 14.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिको ने अगले 48 घंटे बाद कड़ाके की ठंड की चेतावनी दी है। 
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि आने वाले 24 से 48 घंटों में दिन की ठंड भी बढ़ सकती है। दोपहर में 12 बजे के बाद धूप निकलने की संभावना है जो कि दिन मे ठंड से राहत देने का काम करेगी।
दो दिन बाद वेस्टर्न डिस्टरबेंस जाने के बाद उत्तर पश्चिमी हवा गंगा के मैदानी भागों में तेजी से सक्रिय होंगी, जिसके कारण तापमान गिरेंगे और ठिठुरन भरी सर्दी का एहसास होगा।
मौसम में कोहरे के चलते 45 ट्रेनें तय समय से घंटों देरी से कानपुर सेंट्रल पहुंचीं। बरौनी से चलकर नई दिल्ली जाने वाली हमसफर एक्सप्रेस (02563) 26 घंटे और नई दिल्ली से चलकर बरौनी जाने वाली हमसफर (02564) 15 घंटे देरी से कानपुर सेंट्रल आई।
आनंद विहार से चलकर दरभंगा जाने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस तय समय से 08.33 घंटे लेट रही। इंदौर से चलकर बनारस जाने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस (20414) 10.39 घंटे देरी से आई। इनके अलाना कई अलग अलग रुटों पर जाने वाली राजधानी भी लेट रहीं।
ठंड बढ़ने के साथ साथ जू में जानवरों के बाड़ों में भी हीटर आदि लगाए गए हैं। जू में बाघ, तेंदुआ और शेर समेत कई जानवरों के बाड़ों में हीटर, ब्लोअर को लगाया गया है। इसके अलावा जानवरों के खानपान में ऐसी चीजों को बढ़ाया गया है जो कि उनको गर्मी दे सकें।
कड़ाके की ठंड के चलते कानपुर में हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मरीज बढ़े हैं। कार्डियोलॉजी में हार्ट अटैक के लक्षणों वाले 64 मरीज भर्ती किए गए, जबकि 153 अन्य गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में दिखाना पड़ा। हैलट अस्पताल में ब्रेन स्ट्रोक के 18 मरीज भर्ती हुए, जिनमें कुछ के मस्तिष्क की नसें फटने की पुष्टि हुई। वहीं एक मरीज को मृत अवस्था में लाया गया।
कार्डियोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. राकेश वर्मा ने बताया कि ओपीडी में 861 लोगों की जांच हुई और 7 मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके थे। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी के अनुसार, ठंड के कारण हृदय और मस्तिष्क रोगों के साथ-साथ सीओपीडी, अस्थमा, किडनी और लीवर से जुड़े मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। 

डॉक्टरों ने लोगों से ठंड में सतर्क रहने, नियमित दवा लेने और सीने में दर्द, सांस फूलने या अचानक कमजोरी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।