January 21, 2026

संवाददाता
कानपुर।
जमीयत उलेमा उत्तर प्रदेश के महासचिव मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने कहा कि इस्लाम की सही और वास्तविक तस्वीर दुनिया के सामने रखना तथा उसके बारे में फैलाई जा रही गलतफहमियों को दूर करना उलेमा की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इज्लासे मेराजुन्नबी का मूल उद्देश्य पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद के पाकीज़ा, इंसानियत-नवाज़ और अमन के पैग़ाम को पूरी मानवता तक पहुँचाना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना क़ासमी ने कहा कि इस्लाम किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि यह इंसाफ़, भाईचारे, रहम और मानवीय मूल्यों का सार्वभौमिक संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इस्लाम की शिक्षाएं आज के दौर में पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक हैं, जो समाज को शांति और सौहार्द की राह दिखाती हैं।
मौलाना अमीनुल हक़ क़ासमी ने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में कुछ ताक़तें मीडिया के ज़रिये इस्लाम की नकारात्मक छवि पेश करने की कोशिश कर रही हैं, ताकि आम लोग इस धर्म के प्रति भ्रमित हो जाएँ। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह के झूठे प्रचार और दुष्प्रचार से इस्लाम के उजाले को कभी भी कमज़ोर नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि इस्लाम वह चराग़ है जो अल्लाह की हिफ़ाज़त में है, जिसे नफ़रत और झूठ की फूँकों से बुझाया नहीं जा सकता। उलेमा को चाहिए कि वे समाज में फैल रही गलतफहमियों को दूर करें और इस्लाम के वास्तविक संदेश—अमन, इंसानियत और भाईचारे—को मजबूती से सामने रखें।
अंत में उन्होंने लोगों से आपसी सौहार्द, संवाद और सकारात्मक सोच को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यही पैग़म्बर इस्लाम की सच्ची सुन्नत और इंसानी भलाई का रास्ता है। 

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