January 26, 2026

संवाददाता

कानपुर।  गैंगरेप का आरोपी 50 हजार का इनामी दरोगा अमित कुमार मौर्या पुलिस के लिए चुनौती साबित हो रहा है। वारदात को हुए 20 दिन बीत चुके है, आरोपी की तलाश में एसटीएफ समेत चार टीमें 10 जनपदों की खाक छान रही है, लेकिन नतीजा जस का तस है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि– दरोगा विभाग की कार्यशैली से भलीभांति परिचित होने के कारण टीमों की गिरफ्त में नहीं आ पा रहा है। 
वहीं आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पीड़िता के परिवार में भय का माहौल है। पीड़िता के भाई का कहना है कि आरोपी दरोगा की गिरफ्तारी के लिए अधिकारियों के कार्यालय में चक्कर लगाकर थक गए। पीड़िता के भाई ने फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि अब सिर्फ एक ही सहारा है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ… अब जल्द ही जनता दरबार में जाकर उनसे शिकायत करेंगे।
पीड़िता के भाई ने बताया कि घर के बाहर पुलिस का पहरा लगा रहता है, बहन हर समय डरी रहती है, कि कही किसी को कुछ हो न जाए। कहीं भी जाना हो तो पुलिस वालों को बताना पड़ता है। बहन को पुलिस के साए में आना–जाना पड़ता है। हर दिन कोई न कोई कार्रवाई की बात कहकर पुलिसवाले इधर–उधर लेकर जाते हैं। फोन पर बात करने पर भी पुलिस वालों से बचना पड़ता है, ज्यादा बात करने पर टोकते है। परिवार को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सचेंडी थानाक्षेत्र की रहने वाली 14 वर्षीय किशोरी 5 जनवरी की रात शौचक्रिया के लिए गई थी, तभी किशोरी का मुंह दबा कर रेलवे पटरी के किनारे गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था। पीड़िता ने घर आकर आपबीती बताई, जिस पर परिजन उसे चौकी लेकर पहुंचे, जहां आरोपी शिवबरन को पीड़िता ने पहचान लिया। पीड़िता ने दरोगा अमित कुमार मौर्या पर भी गैंगरेप का आरोप लगाया, जिस पर उसे चौकी से भगा दिया गया था।
मामला तूल पकड़ने पर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के आदेश पर सचेंडी पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज किया, लेकिन पॉक्सो एक्ट की धाराएं नहीं बढ़ाई। एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह मौके पर पहुंचे तो आरोपी दरोगा की घटनास्थल पर लोकेशन मिली थी। जांच में सामने आया कि दरोगा उस वक्त अपनी काले रंग की स्कॉर्पियो के साथ मौके पर मौजूद था। जांच रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को दी गई, तो शिवबरन को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद ही दरोगा अमित कुमार मौर्या फरार हो गया।
पुलिस कमिश्नर ने आरोपी पर 50 हजार इनाम घोषित करते हुए, गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ समेत करीब 35 से 40 पुलिसकर्मियों की 4 टीमों का गठन किया। पुलिस ने आरोपी के पैतृक निवास गोरखपुर के महाराजगंज, प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ में रहने वाले रिश्तेदारों, परिचितों व बस्ती में रहने वाली महिला मित्र के घर पर दबिश देकर पूछताछ की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
फरार होने के बाद एक तरफ दरोगा की तलाश में टीमें लगी थी, वहीं दूसरी ओर से उसने 8 जनवरी को अपनी सफाई पेश करते हुए वीडियो वायरल किया। 9 जनवरी को सीएम योगी और पुलिस कमिश्नर से सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए एक लेटर वायरल किया था, पुलिस ने सुरागरसी की तो उसकी आखिरी लोकेशन लखनऊ मिली, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि टीमें लखनऊ पहुंची, लेकिन तब तक दरोगा वहां से निकल चुका था।
पुलिस की हीलाहवाली का नतीजा यह रहा कि आरोपी दरोगा गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट तक पहुंच गया, जहां से पीड़िता को अपना पक्ष रखने का नोटिस दिया गया है, हालांकि अब तक पीड़िता हाईकोर्ट बयान देने नहीं पहुंची है। मामले में एडीसीपी वेस्ट कपिल देव सिंह ने बताया कि प्रयागराज में दरोगा की आखिरी लोकेशन मिलने के बाद, अब तक उसकी कोई लोकेशन नहीं मिली है।